CRICKET; बॉलर और कीपर के नसीब में कम होता है कप्तान बनना!

क्या क्रिकेट केवल बैट्समैन का ही खेल है या बॉलर और विकेट कीपर भी मायने रखते है? मैदान के भीतर ये बात सही लगती है लेकिन जब टीम के नेतृत्व की बात आती है तो अनुभव रखने वाले बाॅलर और विकेटकीपर दरकिनार कर दिए जाते है। पंचायनवे फीसदी कप्तानी बैट्समैन वो भी पहले पांच नंबर के हिस्से में ज्यादातर कप्तानी आती है।
हिंदुस्तानी  टेस्ट क्रिकेट  के इतिहास को खंगाले तो 1932 से लेकर 2026 तक  अड़तीस टेस्ट खिलाड़ियों में से के हिस्से में  कप्तानी आई है। कप्तान तो केवल एक से पांच टेस्ट की ही कप्तानी कर पाए। अगर स्थायित्व का आंकड़ा 20 टेस्ट मान लिया जाए तो केवल 11 कप्तान ही इस मापदंड में  खरे उतरते है। ये कप्तान है
1 विराट कोहली,(68) 2एम एस धोनी (60), 3सौरव गांगुली (49)
4 सुनील गावस्कर (47) 5अजहरुद्दीन(47)
6मंसूर अली खान  पटौदी(40)
7कपिल देव (34)
8सचिन तेंदुलकर(25) 9राहुल द्रविड़ (25)
10रोहित शर्मा (24)  11बिशन बेदी (22) कप्तान जो हिंदुस्तान का  कैप्टन  ब्लेजर पहने है उनमें से  केवल दो बॉलर कपिलदेव(34) और बिशन बेदी(22) ऐसे बॉलर्स है जिन्होंने बीस से अधिक टेस्ट में कप्तानी कर पाए।
विकेटकीपर में केवल एम एस  धोनी  है जिन्होंने 60 टेस्ट में कप्तानी की है।
हिंदुस्तान ने अब तक 601 टेस्ट खेले है जिनमें   509टेस्ट की कप्तानी बैट्समैन ने किया है।82   टेस्ट की कप्तानी बॉलर्स  ने किया है
60 टेस्ट की कप्तानी इकलौते विकेट कीपर्स एम एस धोनी ने किया है।     ये आंकड़े प्रमाणित करते है कि क्रिकेट के खेल में भले ही  बैट्समैन, बॉलर्स और विकेटकीपर्स  का महत्व है लेकिन कप्तानी ज्यादातर बैट्समैन के हिस्से मे ही जाती है।
हिंदुस्तान के कप्तानों  के इतिहास को खंगाले तो कर्नल सी के नायडू पहले कप्तान रहे। वर्तमान में इस जिम्मेदारी को शुभमन गिल निभा रहे है। सी के नायडू से लेकर  शुभमन गिल  की कप्तानी के बीच में  पहली बार किसी बॉलर को  हिंदुस्तानी टेस्ट टीम की कप्तानी मिली थी तो वो बॉलर थे गुलाम अहमद, जिनको दो बार 1955 और 1959 में कप्तानी मिली। उन्होंने तीन टेस्ट में कप्तानी की। गुलाम अहमद के बाद वेंकट राघवन बीस साल  बाद 1974 में कप्तान बने वेंकट पांच टेस्ट में कप्तानी कर पाए।  1976 में वेंकट के बाद बिशन सिंह बेदी बॉलर के रूप तीसरे कप्तान बने।बेदी  ने बाइस टेस्ट में कप्तानी की। बेदी के बाद  कंप्लीट बॉलर तो नहीं पर आलराउंडर के रूप में कपिल देव  1983 में कप्तान बने। उनके पहले तक सभी स्पिनर्स कप्तान बने थे। कपिल देव के साथ ही नए  युग की शुरुवात हुई । हार और बराबरी  से मैच खेलने वाली हिंदुस्तानी टीम ने जीत के लिए खेलना शुरू किया। कपिल देव ने चौंतीस टेस्ट में  कप्तानी की। कपिल देव के बाद 2007 में अनिल के कुंबले बतौर बॉलर कप्तान बने।उनके हिस्से में चौदह टेस्ट आए। सातवें और अंतिम बॉलर कप्तान जसप्रीत बुमराह  रहे जो 2022 में  नियमित कप्तान के बजाय फिलर कप्तान बने। उन्होंने तीन टेस्ट में कप्तानी की।
1932 से लेकर 1980 के दौर में टेस्ट बहुत कम खेले जाते थे। साल में सात आठ टेस्ट खेल लिए बहुत बड़ी बात होती थी। श्री लंका , बांग्ला देश, जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका  के जुड़ने से टेस्ट की संख्या बढ़ी। हिंदुस्तानी  क्रिकेट में सी के नायडू से लेकर विश्वनाथ और फिर कपिल देव से शुभमन गिल का दो दौर देखा जा सकता है। पहले दौर में बीस कप्तान और दूसरे दौर में अठारह कप्तान बने। एक तरफ विराट कोहली सबसे अधिक 68 टेस्ट की कप्तानी का रिकॉर्ड अपने पास रखे है तो  पंकज राय, रवि शास्त्री, और ऋषभ पंत केवल एक टेस्ट में कप्तानी किए है। सुनील गावस्कर, इकलौते कप्तान है जिनको हटा कर वेंकट राघवन, गुंडप्पा विश्वनाथ और कपिलदेव के विकल्प के रूप में भी अलग अलग  समय में तीन बार कप्तान  बनाया गया फिर उन्हें हटा कर सुनील गावस्कर के हाथ में फिर से कप्तानी सौंपी गई।सफलता की बात करे तो विराट कोहली ने 68 टेस्ट में से 40 टेस्ट में जीत हासिल कर सबसे सफल कप्तान माने जाते है।उनके बाद एम एस धोनी और सौरव गांगुली का नाम आता हैविदेश में सीरीज जीतने वाले  ग्यारह कप्तानों में  मंसूर अली खान पटौदी,अजीत वाडेकर, अजहरुद्दीन, कपिलदेव, एम एस धोनी,सौरव गांगुली, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, विराट कोहली, अंजिक्या रहाणे  रोहित शर्मा का नाम है ।

स्तंभकार-संजयदुबे

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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