DEATH; मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, PM मोदी-CM साय समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि, इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति से बदली थी किस्मत

रायपुर, सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 72 साल की उम्र में रायपुर एम्स अस्पताल में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहीं तीजन बाई के निधन से लोककला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है।

छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात लोकगायिका तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। उन्होंने सुबह करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहीं तीजन बाई का इलाज जारी था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत देश के कई बड़े नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनके निधन की खबर फैलते ही छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के राजनीतिक, सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई

कभी इंदिरा गांधी के सामने अपनी प्रस्तुति से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली तीजन बाई ने संघर्षों के बीच पंडवानी को दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। तीजन बाई का जन्म भिलाई के समीप स्थित गनियारी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था। अपनी दमदार आवाज और अद्भुत प्रस्तुति से उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया और पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। देश-दुनिया में दिलाई छत्तीसगढ़ को पहचान

गनियारी में होगा अंतिम संस्कार

परिजनों ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर रायपुर से उनके पैतृक गांव गनियारी ले जाया जाएगा, जहां अंतिम दर्शन के बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में प्रशंसक और शुभचिंतक गांव पहुंचने लगे हैं। परिजनों ने सभी से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने और अंतिम दर्शन के लिए गनियारी पहुंचने की अपील की है। डॉ. तीजन बाई का निधन केवल एक महान लोकगायिका का जाना नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस जीवंत सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति है, जिसने पंडवानी जैसी लोककला को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया।

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई (Teejan Bai Death) के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपनी भव्य प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की इस लोककला को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने शोक की इस घड़ी में उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पद्म श्री और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई ने पूरे देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश हमेशा उनके योगदान का ऋणी रहेगा और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और वर्षों की साधना के बल पर उन्होंने महाभारत की कथाओं को जीवंत किया और छत्तीसगढ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई। भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने भी दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और समर्पण से पंडवानी लोककला को नई पहचान दिलाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई (Teejan Bai News) ने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा ‘पंडवानी’ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारतीय लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

रमन सिंह और भूपेश बघेल ने भी जताया दुख

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा कि आज पंडवानी का एक सुर हमेशा के लिए शांत हो गया। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को वैश्विक पहचान दिलाई और अनगिनत कलाकारों को प्रेरणा दी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी को जीवंत बनाए रखा और छत्तीसगढ़ का गौरव विश्वभर में बढ़ाया।

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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