BIRD; इन 5 पक्षियों को घर में रखा तो सीधे जाएंगे जेल, भूलकर भी न करें इन्हें पालने की गलती

रायपुर, रंग-बिरंगे पक्षी हमेशा से इंसानों को आकर्षित करते रहे हैं। इनकी चहचहाहट और खूबसूरत पंख किसी भी घर को रौनक से भर सकते हैं, लेकिन कुछ पक्षियों को पालतू बनाना मुश्किल खड़ी कर सकता है? भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कई पक्षियों को पकड़ना, खरीदना या इन्हें पालना अपराध माना गया है।

वन अफसरों के अनुसार इस आर्टिकल में ऐसे 5 पक्षियों को पिंजरे में कैद करना जेल जाने की वजह बन सकता है। इन पक्षियों को पकडने ,बेचने , खरीदने वालों पर सख्ता कार्यवाही का प्रावधान है।

पहाड़ी तोता

हरे पंखों और लाल चोंच वाला यह सुंदर तोता लोगों को बहुत भाता है, लेकिन इसे पालना गैरकानूनी है। जंगलों में पाए जाने वाला यह पक्षी खुले वातावरण में ही खुश रहता है। खेती की जमीनों से लेकर घने जंगलों तक, यह कहीं भी रह सकता है, लेकिन पिंजरे में इसकी चहक फीकी पड़ जाती है। लगातार अवैध शिकार और तस्करी के कारण इनकी संख्या घट रही है।

कोयल

गर्मी के मौसम में “कू-ऊ कू-ऊ” की आवाज सुनकर हर कोई पहचान जाता है कि कोयल आ गई है। इसकी मधुर आवाज भारतीय साहित्य और कविताओं में भी खूब गाई गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोयल को पिंजरे में कैद करना कानूनन अपराध है? नर कोयल काले-नीले रंग का और लाल आंखों वाला होता है, जबकि मादा भूरे रंग की होती है। यह पक्षी बरसात के आगमन का संकेत भी माना जाता है, लेकिन याद रखें यह केवल जंगलों और खुले आसमान में ही अपनी असली पहचान बनाए रखता है।

उल्लू

भारतीय संस्कृति में उल्लू को कभी लक्ष्मी का वाहन तो कभी शुभ-लाभ का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से कई लोग इसे घर में रखने की सोचते हैं, लेकिन सच यह है कि उल्लू रात में सक्रिय रहने वाला पक्षी है और इकोसिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करता है। दिन में साफ न देख पाने के कारण यह आसानी से पकड़ लिया जाता है और अक्सर अवैध व्यापार का शिकार बनता है। ऐसे में, याद रखें- इसे पालना कानून के खिलाफ है।

पहाड़ी मैना

मानव जैसी बोली की नकल करने में माहिर यह पक्षी हर किसी को मोहित कर लेता है, लेकिन इसकी यही खूबी इसे खतरे में डाल रही है। लोग इसे घर ले जाने के लिए जंगलों से पकड़ते हैं, जिससे इनकी संख्या तेजी से घट रही है। लगातार वनों की कटाई और अवैध शिकार ने इसे संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में ला खड़ा किया है।

लाल मुनिया

छोटा कद, चटक लाल रंग और चिड़िया जैसी चहक- यही लाल मुनिया की पहचान है। इसकी खूबसूरती देखकर लोग इसे पिंजरे में बंद करना चाहते हैं, लेकिन यह भी पूरी तरह संरक्षित पक्षियों में आता है। अपने प्राकृतिक आवास से दूर, यह पक्षी कभी भी उतनी खुशी और सुरक्षा महसूस नहीं कर सकता। इसलिए, इसे भी अपने घर की दीवारों में कैद करनी की गलती भूलकर न करें।

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