FARMING; कृषि मंत्री रामविचारबोले-प्राकृतिक खेती एवं देशी किस्मों को अपनाने से किसान होंगे खुशहाल

0 बलराम जयंती एवं किसान दिवस पर कृषक संगोष्ठी
रायपुर, भगवान बलराम जयंती एवं किसान दिवस के उपलक्ष्य में “प्राकृतिक खेती, गौ कृषि वाणिज्य एवं तिलहन उत्पादन” विषय पर एक दिवसीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि भगवान श्री बलराम खेती किसानी के देवता है। किसान समृद्ध, संपन्न और सक्षम होंगे तो निश्चित ही देश और प्रदेश खुशहाल होगा। उन्होंने किसानों को जैविक खेती करने और देशी किस्मों को बचाने की अपील की। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान उन्नत किसानों को विभागीय योजनाओं के तहत अनुदान राशि का चेक एवं उपकरण प्रदान किए। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, गो कृषि वाणिज्यम एवं तिलहन उत्पादन पर भी विचार मंथन किया गया।
कृषि मंत्री ने कहा कि आज देश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए अच्छा माहौल बन रहा है और पढ़े लिखे युवा भी अच्छी नौकरियां छोड़कर प्राकृतिक खेती को ओर अग्रसर हो रहे हैं। भगवान श्री बलराम जी की जयंती के मौके पर राजधानी सहित प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में किसान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय कृषि मंत्री जी द्वारा किसानों को खेती में उपयोग होने वाले आदानों का वितरण किया गया।
कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए किसानों से जैव विविधता के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान ऊर्जावान और ज्ञानवान है, फिर भी जहां जरूरत पड़े किसानों को कौशल विकास एवं तकनीक के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद दिया जाएगा। आलोक सिंह ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष-किसान मोर्चा, छत्तीसगढ़ ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में बढ़ती उत्पादन लागत और घटती मृदा उर्वरता जैसी चुनौतियों का समाधान प्राकृतिक एवं गौ-आधारित खेती से ही संभव है। किसानों से अपील की गई कि वे जैविक उपाय अपनाकर खेती की लागत घटाएँ और अपनी आय में वृद्धि करें।
मनीश शर्मा, संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने किसानों को गौ-आधारित प्राकृतिक खेती के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जरूरत है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक एवं जैवक कृषि के क्षेत्र में काफी कार्य किये गये हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय में एक हेक्टेयर क्षेत्र में गौ आधारित का जैविक समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल विकसित किया गया है। कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसलें जैसे धान, चना, सोयाबीन, मक्का (स्वीटकार्न) आदि फसलों की गौ आधारित जैविक खेती करने की पद्धति विकसित की गई है। सुगंधित धान एवं चना की विभिन्न किस्मों की पहचान की गई जो जैविक खेती में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।
डॉ. रवि रतन सक्सेना, कुलपति, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग ने प्रदेश में उद्यानिकी एवं वानिकी फसलों के क्षेत्र विकास का महत्व बताते हुए कहा कि भविश्य में छत्तीसगढ़ को उद्यानिकी फसलों के प्रचुर उत्पादन हेतू जाना जाएगा।कार्यक्रम में माधों सिंह, अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, संचालक कृषि श्री राहुल देव, प्रबंध संचालक श्री अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल सदस्य श्रीमती जानकी चन्द्रा, कृषि एवं संबंध विभाग के अधिकारी, भारतीय किसान संघ के सदस्य, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।