प्रयागराज, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा आदेश सुनाया है. कोर्ट ने शादीशुदा पुरुष के बालिग महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को अपराध नहीं माना है. हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत कानून के तहत चलती है, सामाजिक सोच के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.
‘नैतिकता और कानून दो अलग- अलग बातें हैं’
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने याचिकाकर्ता अनामिका और नेत्रपाल की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नैतिकता और सामाजिकता से कानून नहीं चलता है. नैतिकता क्या कहती है और कानून क्या कहता है. ये दोनों अलग-अलग बातें हैं. अगर कानून नहीं टूटता है तो सामाजिक सोच के आधार पर किसी पर भी मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने नेत्रपाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.
कोर्ट ने SP को दी सुरक्षा की जिम्मेदारी
याचिकाकर्ता अनामिका और नेत्रपाल ने हाई कोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक लगाने और सुरक्षा को लेकर याचिका लगाई थी. जिसके बाद डिविजन बेंच ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को दोनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है. इसके साथ ही कोर्ट ने अनामिका के घरवालों को सख्त हिदायत दी है कि परिवार के किसी भी सदस्य को किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंचाया जाए. किसी भी तरह धमकी देने या फिर उन्हें मैसेज देने की की कोशिश भी ना की जाए. कोर्ट ने शाहजहांपुर के एसपी को दोनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी है. कोर्ट ने कहा कि दोनों की हिफाजत करना पुलिस का दायित्व है.
मां की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR
पूरा मामला शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने का है. यहां अनामिका की मां कांति ने बेटी के अपहरण का मामला दर्ज करवाया था. मां का आरोप था कि नेत्रपाल ने बेटी का बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया है. वहीं मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अनामिका की मां ने एफआईआर में बेटी की उम्र 18 साल बताई है. इससे साबित होता है कि बेटी बालिग है. दो बालिग लोग अपनी मर्जी से अगर साथ रह रहे हैं तो ये अपराध नहीं है.







