0 वैज्ञानिक शाखाकर्तन से गुणवत्ता और आय बढ़ाने पर जोर, बस्तर में नए फड खोले गए
रायपुर, तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 को लेकर समूचे छत्तीसगढ में हरा सोना संग्रहण की प्रारंभिक तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य के विभिन्न वनमंडलों में जगह जगह शाखाकर्तन, संग्रहण और भंडारण संबंधी कार्यशाला आयोजित की जा रही है। हरा सोना संग्रहण के लिए इस सीजन में नक्सलमुक्त हो रहे बस्तर को फोकस किया जा रहा है। सुकमा में दो एवं नारायणपुर वनमंडल में 10 नए फड बनाए गए है। बस्तर में इस बार 5 लाख 64 हजार मानक बोरा हरा सोना संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है।
छत्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ ने राज्य में इस सत्र में गत वर्ष की तरह 16 लाख 72 हजार 600 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा है।प्रति मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण दर 5500 रुपये है। राज्य में तेंदूपत्ता व्यवसाय करीब 1170 करोड रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।जिसका लाभ वनवासियों को होगा। सामान्यत: अप्रैल के दूसरे सप्ताह से तेंदूपत्ता तोडाई शुरु होती है, क्योंकि तेंदूपत्ता तैयार होने में 40 से 45 दिन का समय लगता है। इस बार मौसम अनुकूल रहने के आसार है, इसलिए संघ ने तैयारियां जोरशोर से शुरु कर दी है।

कार्यकारी संचालक संजीता गुप्ता ने की समीक्षा
संघ की कार्यकारी संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता ने गत दिवस बस्तर अंचल का दौरा कर जगह जगह वन अफसरों की बैठक लेकर संग्रहण की प्रारंभिक तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें बाताया गया कि कार्यशाला आयोजित कर वन अमले को शाखाकर्तन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य सिर्फ औपचारिक प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अमले को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ना और पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना भी है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने के निर्देश
बता दें तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज का काम नहीं है, यह राज्य के लाखों वनवासियों एवं ग्रामीण परिवारों की आय से सीधे जुड़ा हुआ विषय है. ऐसे में कार्यकारी संचालक संजीता गुप्ता ने शाखाकर्तन से लेकर गोदामीकरण तक हर चरण में गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। गोदामों की मरम्मत के साथ खाली कराने कहा गया है ताकि संग्रहण के बाद गोदामीकरण में दिक्कत न हो। पुराने अविक्रित तेंदूपाता की नीलामी भी की जा रही है।
लक्ष्य और अनुशासन दोनों जरूरी
कार्यकारी संचालक संजीता गुप्ता ने कहा है कि लक्ष्य प्राप्ति के साथ गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है. केवल अधिक मात्रा में संग्रहण पर्याप्त नहीं है. पत्तों की गुणवत्ता, गड्डी बंधाई का मानक और भंडारण की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि संग्रहण, भंडारण और परिवहन की प्रत्येक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाए. अभिलेखों का संधारण सटीक और अद्यतन होना चाहिए.
वर्ष 2026 का सत्र रहेगा महत्वपूर्ण
वन विभाग की तैयारी से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार तेन्दूपत्ता संग्रहण सत्र को पूरी रणनीति के साथ संचालित किया जाएगा। गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता तीनों पर समान रूप से जोर दिया जा रहा है। यदि शाखाकर्तन से लेकर गोदामीकरण तक हर चरण तय मानकों के अनुसार पूरा होता है तो वर्ष 2026 का सत्र न केवल लक्ष्य की दृष्टि से सफल रहेगा, बल्कि वनवासियों एवं ग्रामीणों की आय में भी मुकम्मल वृद्धि कर सकता है।





