POLITICS; US मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के करीबी को मात देने वाली पिया डांडिया ने रचा इतिहास, जयपुर से खास रिश्ता

फ्लोरिडा, एजेंसी, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. CNN के मुताबिक मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट दोनों पर कब्जा कर लेंगे. इस चुनाव में ट्रंप के कई करीबी नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में फ्लोरिडा से डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया डांडिया ने जीत दर्ज की है. पिया ने ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के कारोबारी उम्मीदवार केसी अस्कर को पराजित किया. पिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं. उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं. 

राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले अप्रवासी भारतीय माता-पिता की बेटी पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर बड़ा इतिहास रच दिया है. 

1980 में जयपुर से अमेरिका चले गए थे पिया के माता-पिता

पिया डांडिया के माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका पहुंचे थे और यहीं बस गए. अमेरिका आने के बाद उनके पिता डॉ. रोहित डांडिया ने बतौर डॉक्टर सेवाएं जारी रखीं, जबकि उनकी मां ने 40 वर्ष की उम्र में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की. इस स्कूल की शुरुआत भी मुख्य रूप से पिया की शिक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी.डांडिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े माहौल में हुआ. उनके माता-पिता बचपन में उन्हें भारत भेजते थे, ताकि वह अपने चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें और अपनी जड़ों को समझ सकें.

इंटरव्यू में खुद बताया था- अकेले भारत भेजते थे माता-पिता

अगस्त 2025 में न्यू इंडिया अब्रॉड को दिए एक इंटरव्यू में पिया ने बताया था, “मेरे माता-पिता बहुत छोटी उम्र से ही मुझे अकेले भारत भेजते थे, ताकि मैं अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता सकूं. ये यात्राएं मेरे जीवन को बदलने वाली साबित हुईं और मेरी पहचान को आकार देने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इनसे मुझे समझने का मौका मिला कि अलग-अलग लोकतंत्र किस तरह काम करते हैं और दुनिया में असमानता किस तरह मौजूद है.”

दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया

हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गर्मी की छुट्टी दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने में बिताई. वह आशा कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ जुड़ी थीं और सात से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों को पढ़ाती थीं. इस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “वंचित बच्चों को पढ़ाते हुए मैंने सीखा कि लोगों के बीच वास्तव में अंतर उनकी क्षमताओं का नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का होता है जिनमें उन्हें जीवन बिताना पड़ता है.”

हार्वर्ड और बोस्टन से पढ़ाई

डांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से गवर्नमेंट विषय की पढ़ाई की और बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. उन्होंने बोस्टन में ‘टीच फॉर अमेरिका’ कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया. इसके बाद महज 28 वर्ष की उम्र में वह न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं.

2020 में व्हाइट हाउस की फेलो चुनी गईं पिया डांडिया

वर्ष 2020 में डांडिया को व्हाइट हाउस फेलो चुना गया था. इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया. बाद में उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों का नेतृत्व किया. इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने उन्हें राज्य की पी-20 परिषद में भी नियुक्त किया था.

चुनावी राजनीति में यह उनका पहला प्रयास था. शुरुआत में उन्होंने फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था, जहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट से होना था. हालांकि, फ्लोरिडा में मध्यावधि परिसीमन के बाद उन्होंने 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने का फैसला किया. 18 अगस्त को उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीता.

फ्लोरिडा पॉलिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण के लिहाज से यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जाता है. यहां करीब 1.85 लाख रिपब्लिकन, 1.46 लाख डेमोक्रेटिक और 1.50 लाख अन्य राजनीतिक संबद्धता वाले मतदाता हैं.

प्रचार के दौरान- महंगाई, करप्शन और गन कल्चर रहे मुख्य मुद्दें

अपने चुनाव प्रचार में डांडिया ने महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. फ्लोरिडा पॉलिटिक्स से बातचीत में उन्होंने कहा था, “दक्षिण फ्लोरिडा के लोग बढ़ती लागत और वाशिंगटन से निकलने वाली दिखावटी राजनीति से तंग आ चुके हैं.”

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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