
रायपुर, चक्रवात ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) और बंगाल की खाड़ी से बने मौसमी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में हो रही बेमौसम तूफानी बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खेतों में खड़ी धान की फसल और सब्जियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है.
चक्रवाती तूफान अर्नब का असर समूचे छत्तीसगढ में भी दिखाई दे रहा है. कल सुबह से राज्य में हवा और बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार, 30 अक्टूबर से मौसम में सुधार होने की उम्मीद है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल बारिश के कारण गिर गयी है. सैकड़ों एकड़ में लगी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है. किसान धान की कटाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अचानक हुई बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में पानी जमा होने से कटाई का काम प्रभावित हो सकता है. वहीं, जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में रखा है, उन्हें भी फसल खराब होने का डर सता रहा है.
कांकेर, महासमुंद और बस्तर संभाग सहित कई जिलों में पककर तैयार खड़ी धान की फसलें तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में बिछ गई हैं। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है और फसल खेतों में खुली पड़ी है, वह बारिश में भीगने से खराब हो रही है और दानों में नमी आने का खतरा बढ़ गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन इलाकों में फसल पकने की अवस्था में है, वहां अगले 2 से 4 दिनों तक कटाई का काम रोक दें।
साग-सब्जियों को सबसे अधिक नुकसान की आशंका
कृषि विभाग के अधिका रियों के अनुसार ने बताया कि लगातार बारिश से सबसे अधिक नुकसान साग-सब्जियों को होने की आशंका है. तेज हवा चलने पर पककर तैयार धान की फसल गिर सकती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा. उन्होंने बताया कि एक-दो दिन पहले बोयी गयी सरसों और चना की फसल के खेतों में पानी जमा होने से बीज सड़ने का खतरा है. हालांकि, पहले बोयी जा चुकी सरसों और चना की फसल को फिलहाल नुकसान की आशंका कम है. लगातार बारिश के कारण किसानों को मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने का इंतजार है. किसानों को सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में धान, दलहन एवं तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां आगामी दो से चार दिनों तक कटाई का कार्य स्थगित रखें। जिन किसानों ने फसलों की कटाई प्रारंभ कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर रखें। खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि जलभराव से फसलों को नुकसान न पहुंचे। सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवाती प्रभाव से तेज हवा चलने की संभावना को देखते हुए लता वाली सब्जियों, विशेषकर करेला एवं लौकी जैसी फसलों के लिए सहारे की व्यवस्था करें। केले के पौधों एवं फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा दें। सब्जियों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ।







