16 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य को विधान सभा सीट संख्या के आधार पर राज्य सभा के लिए दो महिला निर्वाचित हो जाएंगी।ये दो महिला है भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की दोबारा प्रत्याशी बनी फूलों देवी नेताम।राज्य निर्माण के बाद पच्चीस साल में अब तक 23 व्यक्तियों को देश के उच्च सदन याने राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। महिलाओं की संख्या देखे तो इसमें कांग्रेस की मोहसिना, छाया वर्मा, रणजीत रंजन,किदवई, फूलोदेवी नेताम है ।भाजपा की तरफ से सरोज पांडे के बाद लक्ष्मी वर्मा दूसरी प्रत्याशी है।
राज्यसभा, भंग नहीं होने वाला सदन है इस कारण अंतराल में चुनाव होते रहते है।16 मार्च को भी देश भर की 31 सीटों का चुनाव होना है ।छत्तीसगढ़ में फूलो देवी नेताम और के टी तुलसी के कार्यकाल पूर्ण होने के कारण रिक्त दो सीट में चुनाव होना है। कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका दिया है। भाजपा की तरफ से आश्चर्यजनक से रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष और महिला आयोग की वर्तमान सदस्य लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा में भेजने की घोषणा कर दी है।
फूलोंदेवी नेताम और लक्ष्मी वर्मा के नामों की घोषणा होने से पहले दोनों पार्टियों की तरफ से कुछ नामो की चर्चा रही,लेकिन महिला सशक्तिकरण का जादू चला। टी एस बाबा,भूपेश बघेल के नाम कांग्रेस से सामने आए तो भाजपा से पूर्व विधान सभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल और सरोज पांडे का नाम आगे बढ़ा था। जातीय समीकरण में कांग्रेस के टी एस बाबा और भाजपा के गौरी शंकर अग्रवाल और सरोज पांडे सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि है। छत्तीसगढ़ में राजनीति की धुरी पिछड़ा और आदिवासी वर्ग में केंद्रित हो गया है इसका प्रमाण राज्य सभा जाने वाले दोनों इन वर्गों से आती है।
राज्यसभा को आमतौर पर देश के उच्च सदन माने जाने के कारण हर राजनैतिक दल ऐसे प्रत्याशियों को चयनित किया करता आया है जिनका मूल्य उनकी पार्टी के अनुसार ज्यादा है।ऐसे लोग प्रत्यक्ष याने लोकसभा चुनाव जीतने की क्षमता नहीं रखते है। मनमोहन सिंह, अर्थ शास्त्री थे, दिल्ली से लोकसभा चुनाव में पराजित हो गए थे उन्हें 1991 से राज्यसभा में कांग्रेस ने आसाम से निर्वाचित किया था। पांच बार आसाम और छठवीं बार राजस्थान से मनमोहन सिंह राज्यसभा में रहे। वे देश के पहले प्रधानमंत्री रहे जो लोकसभा के सदस्य नहीं थे। 1998 में दिल्ली से चुनाव लड़े थे लेकिन वो
भाजपा के व्ही के मल्होत्रा से तीस हजार मतों से पराजित हो गए थे।
बात छत्तीसगढ़ से राज्यसभा जाने वाले सदस्यों की ले तो मोतीलाल वोरा अविभाजित मध्य प्रदेश से राज्य से 1988 से पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ से 2002,2008 और 2014 में राज्य सभा सदस्य बने। भगत राम मनहर, अजीत जोगी, दिलीप सिंह जूदेव दो दो बार राज्य सभा के सदस्य निर्वाचित हुए हैं। फूलोदेवी नेताम इस क्रम चौथी व्यक्ति है।
छत्तीसगढ़ से ऐसा कोई व्यक्ति जो किसी क्षेत्र विशेष में ज्ञान रखता हो उसे किसी अन्य राज्य से सदस्य बनाकर भेजा गया हो ऐसा उदाहरण देखने को नहीं मिलता है। स्वयं छत्तीसगढ़ से किसी क्षेत्र विशेष के जानकार व्यक्ति को दोनों पार्टी न तो खोज सकी और न ही उनके सेवा लेने का जोखिम उठा पाई। ये जरूर है कि छत्तीसगढ़ के विधान सभा सदस्यों ने उत्तर प्रदेश के मोहसिना किदवई, राजीव शुक्ला, बिहार के रणजीत रंजन और पंजाब के के टी तुलसी को जरूर भेजा है।
छत्तीसगढ़ के व्यक्ति राज्य सभा के सदस्य बने उनमें लखीराम अग्रवाल ,दिलीप सिंह जूदेव, गोपाल व्यास, शिव प्रताप सिंह, नंद कुमार साय, भूषण लाल जांगड़े, रणविजय सिंह,राम विचार नेताम और सरोज पांडे देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम है, इनमें लक्ष्मी वर्मा का नाम अब जुड़ जाएगा।
कांग्रेस से दयाल दास कुर्रे, मोतीलाल वोरा,भगत राम मनहर, कमला मनहर, मोहसिना किदवई, छाया वर्मा, के टी तुलसी, रणजीत रंजन,राजीव शुक्ला और फूलोदेवी नेताम कांग्रेस का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में करते आए है। फूलोदेवी दूसरी बार राज्य सभा जा रही है। अविभाजित मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के महंत लक्ष्मी नारायण दास, दयाल दास कुर्रे,भगत राम मनहर, अजीत जोगी,मोतीलाल वोरा, दिलीप सिंह जूदेव, गोविंदराम मिरी भी राज्य सभा जा चुके है।
स्तंभकार-संजयदुबे







