SC; ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो कटेगी घर की बिजली? सुप्रीम कोर्ट का नियम तोड़ने वालों को 440 वोल्ट का झटका

नई दिल्‍ली. सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त स्पीडोमीटर पर नजर रखना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना अब और भी ज्यादा जरूरी होने वाला है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग ट्रैफिक चालानों की वसूली को लेकर एक ऐसा आइडिया दिया है जिसे सुनकर वाहन चालकों के होश उड़ सकते हैं. देश की सर्वोच्‍च अदालत ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुझाव दिया है कि अनपेड ई-चालान के पेंडिंग जुर्माने की वसूली के लिए ट्रैफिक चालानों को सीधे बिजली के बिल से जोड़ा जा सकता है. सोचिए, अगर आप ट्रैफिक फाइन नहीं भरते हैं तो आपके घर की बिजली कट सकती है. यह विचार सुनने में भले ही चौंकाने वाला लगे, लेकिन अदालती गलियारों में इसे लेकर गंभीर चर्चा छिड़ गई है.

क्या है पूरा मामला और आंकड़े?
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक वॉयलेशन और पेंडिंग जुर्माने की वसूली से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट को यह जानकारी दी गई कि देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान बकाया हैं, जिसमें से केवल 25,000 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं. भारी-भरकम रकम के इस बैकलॉग को खत्म करने और लोगों में ट्रैफिक नियमों का डर पैदा करने के लिए ही कोर्ट ने ये कड़े सुझाव दिए हैं.

बिजली काटने से लेकर गाड़ी सीज करने तक के सुझाव
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने सुझाव दिया कि यदि कोई लंबे समय तक ट्रैफिक चालान नहीं चुकाता है, तो अधिकारियों को बिजली कनेक्शन काटने जैसे सख्त कदम उठाने पर विचार करना चाहिए. इसके अलावा बेंच ने रैंडम व्हीकल चेकिंग और उन गाड़ियों को जब्त करने की भी बात कही जिन पर पुराने चालान बकाया हैं. सुप्रीमकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जब तक बकाया जुर्माना नहीं भरा जाता, तब तक ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को रिन्‍यू, फिटनेस और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाई जानी चाहिए.

इतना ही नहीं, बकायेदार गाड़ियों को परिवहन (Parivahan) पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने और डुप्लीकेट आरसी या ओनरशिप ट्रांसफर जैसी सेवाओं पर भी शिकंजा कसने की बात कही गई है. ये सभी उपाय और सुझाव कोर्ट में सुनवाई के दौरान चर्चा के तौर पर सामने आए हैं, यानी फिलहाल ये कोई अंतिम नियम या निर्देश नहीं हैं. लेकिन कोर्ट का रुख साफ है कि सरकारें आने वाले समय में वसूली के लिए कुछ बेहद कड़े कदम उठा सकती हैं.

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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