
0 मां काली की मूर्ति कलकत्ता से लाकर स्थापित की गई थी, नौ मंदिरों का धार्मिक स्थल
अर्जुन तिवारी
रायपुर, खारुन नदी तट पर दुर्ग जिले के रानी तराई के पास स्थित ग्राम कौही के ऐतिहासिक मां काली मंदिर में नवरात्रि पर्व बड़े ही धूमधाम से प्रारंभ हुआ । मां काली की मंदिर में मालगुजारी जमाने से शताधिक बरासों से मनोकामनाएं ज्योति कलश जलते आ रहे है और आज भी परंपरा आनवरत जारी है। यहां पर करीब 25 एकड में कई प्र्तिष्ठित देवी -देवताओं की मंंदिर है।
कौही के वयोवृद्ध नागरिकों और पूर्व मालगुजारों के मुताबिक मालगुजार मोहन तिवारी द्वारा अपने हिस्से की खेतिहर भूमि पच्चीस एकड़ मां काली और राम दरबार के नाम से चढ़ाए (दान ) गये है तदुपरांत मोहन तिवारी वैराग्य जीवन में आ गए। तब से वे मोहनानंद तिवारी के नाम से जाने जाते थे। बताते है कि रामधार के प्रथम पुत्र बेनी तिवारी की ऊंचाई को पैमाना मानकर मोहनानंद के एक सांकेतिक मूर्ति मां काली के मंदिर के सामने स्थापित किया गया है जो आज भी विद्यमान है
परिवार के अजय तिवारी ने बताया कि नवरात्र में मां काली के मंदिर में सैकड़ों मनोकामनाएं ज्योति कलश भक्तों के द्वारा जलाए गए है। बताया जाता है कि मानोकामनाएं ज्योति कलश जलाने से भक्तों का हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक मालगुजारों द्वारा कौही में नौ मंदिर स्थापित किए गए है जो आज भी विख्यात है। एक कथा के अनुसार मां काली की मूर्ति को पूर्व मालगुजार मोहन तिवारी द्वारा कलकत्ता से ला कर स्थापित किया गया है।
बताते चलें मोहनानंद का मालगुजारी परिवार पांच गांव में फैला था जो क्रमश कौही, सिलतरा, बोड़ा ,गुजरा और रामपुर में रहा करता था ।अंतिम मालगुजारी के रूप में रामस्वरूप तिवारी और रामधार तिवारी को माना जाता है जिसका एक बंटवारा कौही और एक का बटवारा सिल्तारा सेमरा धमतरी जिला में विभक्त था। रामस्वरूप के चार पुत्र थे जिनका स्वर्गवास हो चुका है। उनके नाती पोती आज भी कोई रानीतराई तो कोई रायपुर में अपना जीवन-यापन कर रहे है । कोई पुलिस विभाग में अपनी सेवा दे रहे है तो कोई योगा शिक्षा देने के कार्य करते है।
वही जिनका सिल्यारा में मालगुजारी था उनका नाम रामाधार तिवारी था। उनके दो पुत्रों में बड़ा पुत्र बेनी तिवारी शिक्षा विभाग से सेवा निवृत को कर धमतरी में निवास करने लगे है। वही बेनी तिवारी का एक पुत्र महेंद्र तिवारी था जो स्वर्ग सुधार चुके है। महेंद्र तिवारी का भी एक पुत्र रत्नेश तिवारी है जो अपने दादा बेनी तिवारी के पास धमतरी में रहने लगे है। वही रामाधार तिवारी का दूसरा पुत्र अर्जुन तिवारी है जिनका भी एक पुत्र धनंजय तिवारी है, जो दीपक के रूप में भी जाने जाते है जो एक व्यवसाय चलाते है और अपने पिता अर्जुन तिवारी के साथ रायपुर में रहते है।अर्जुन तिवारी वर्तमान में एक बिल्डर के पास साइड इंचार्ज के रूप में अपना कार्य करते है।







