SC; ‘गांवों में पास्टर की एंट्री नहीं’, सुको ने बरकरार रखा फैसला, हाईकोर्ट ने कहा था-जबरन धर्मांतरण पर रोक गलत नहीं

नई दिल्ली/रायपुर, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों में पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश के मामले में याचिका खारिज कर दी है। गांव के बाहर बोर्ड लगाए गए हैं कि पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों की रोक से संबंधित होर्डिंग के मामले में हाईकोर्ट ने फैसला दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसे सोमवार को खारिज कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस तरह के होर्डिंग को हटाने के अनुरोध वाली दो अलग-अलग याचिकाओं का पिछले साल अक्टूबर में निपटारा कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि लालच या धोखाधडी के जरिये धर्मातंरण पर लगाम लगाने के लिए होर्डिंग लगाने के कदम को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता के समक्ष सुनवाई के लिए आई।

दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने पादरियों पर कथित हमलों से संबंधित एक अलग मामले का हवाला दिया, जो  सर्वूच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका सीमित थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने अब सर्वोच्च न्यायालय में दायर अर्जी में कई नये तथ्य और दस्तावेज शामिल किए हैं। दलीलें सुनने के बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

कई गांव में लगे हैं होर्डिंग

कांकेर समेत बस्तर के 14 से ज्यादा गांवों में पास्टर , पादरियों और धर्मांतरित ईसाईयों के प्रवेश पर रोक लगाने के पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। कांकेर जिले के 14 गांवों में पास्टर और पादरियों के प्रवेश को लेकर विवाद हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, धर्म परिवर्तन की घटनाओं के बाद उन्होंने “परंपरा और संस्कृति की रक्षा” के नाम पर यह कदम उठाया था।

कोर्ट ने खारिज की याचिका

इस अभियान की शुरुआत अगस्त 2025 में कुड़ाल गांव से हुई थी, जहां ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर गांव की सीमा पर पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 14 गांवों में यह अभियान फैल गया। इस पोस्टर के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी केस दायर किया गया था लेकिन कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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