BUDGET; आया रे खिलौने वाला खेल खिलौने ले के आया रे….

आया रे खिलौने वाला खेल खिलौने ले के आया रे…………..
बचपन फिल्म का ये गाना न जाने क्यों आज याद आ रहा है। अपेक्षा, हिंदी शब्दकोश का ऐसा शब्द है जिसके चलते आम आदमी( इसमें अभिजात्य वर्ग को कोई खास सरोकार नहीं होता है) सरकार की तरफ मुंह बाएं किए खड़ा रहता है। जितना मिल चुका है, उससे असंतुष्ट और मुफ्त में क्या मिलेगा , ये अपेक्षा, साल दर साल बढ़ते जा रही है।
भारत के संविधान के प्रस्तावना में एक कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना की गई है। कल्याणकारी राज्य वह राज्य होता है जो नागरिकों के मूलभूत सुविधा का ख्याल रखने की जिम्मेदारी को निभाने की ईमानदार नीयत रखता है।ऐसा माना जाता है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य(जिसमें उत्तम आवास,स्वस्थ वातावरण,भोजन, प्रकाश, पानी समाहित है) को कल्याणकारी राज्य का नैतिक उद्देश्य माना गया है।
बजट, इन सभी प्रकार के उद्देश्यों का एक रोडमैप होता है। मंजिल पर पहुंचने की तैयारी करना मंजिल पर पहुंचने की प्रक्रिया होती है। अगर ईमानदार प्रयास न हो तो भटकाव ही दिखता है। छत्तीसगढ़ सरकार के बजट का आंकलन आपके द्वारा किया गया है। संकल्प का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के लोगों का पलायन रायपुर और दिल्ली होते हुए विदेश का न हो और 21 साल बाद ऐसा वातावरण निर्मित हो कि अमेरिका और यूरोप की प्रतिभाएं जशपुर और बस्तर में आएंगी।
कागज पर विभिन्न रंगों के समायोजन से बना स्केच की सुंदरता को तात्कालिक रूप से देखना एक सुखद अनुभव है लेकिन उन्हीं रंगों का सदैव अपरिवर्तित रहना दुखद होता है। छत्तीसगढ़ राज्य अपने जीवन के प्रथम ब्रह्मचर्य आश्रम के पच्चीस साल पूरा कर तरूणाई से गृहस्थी की ओर अग्रसर हो चुका है। आकार में राजधानी मेट्रो कल्चर की ओर बढ़ रहा है।
रात में हवाई जहाज से शहर को देखो तो हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे के सदृश दिखता है। ये तीनों शहर आईटी सेक्टर के मिसाल है। छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान बच्चों की फौज यहां अपने ज्ञान के बल पर लाखों करोड़ों का पैकेज पा रहे है। पर राज्य में विकास की अपार संभावना लिए ये शहर बांहे पसारे खुले मन से पलक पावड़े बिछाए हुए है।
छत्तीसगढ़ में सत्रह साल भाजपा और साढ़े सात साल कांग्रेस की सरकार रही है। पच्चीस साल में राज्य के होनहार प्रतिभावान बच्चों के लिए हम पच्चीस कंपनी नहीं ला सके। (MOU)मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की कतारें लगी लेकिन एक ईंट भी नहीं जुड़ी। पच्चीस सालों में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का जी जेन वर्सन के रूप में AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) आ गया है।अब नए MOU का मौसम आ गया है। राज्य के भाजपा सरकार के पहले बजट में ज्ञान, दूसरे में गति और अब तीसरे बजट में संकल्प में बाते बहुत है। मुझे भाजपा के ही एक पूर्व मंत्री का सदन में दिए व्यक्तव्य को याद करने का मन हो रहा है जिन्होंने योजना और उसके अमल पर तीखा सच कहा था कि “राज्य में हर साल लाखों बालिकाओं को साइकल देने की मूर्त योजना है लेकिन हम एक भी साइकल बनाने वाली कंपनी को छत्तीसगढ़ में स्थापित करने का एमओयू नहीं कर पाए।”
राजनैतिक इच्छाशक्ति का यथार्थ की भूमि पर टिकना बहुत बड़े सामर्थ्य की बात है। तकनीकी सहमति पैसे का आबंटन, और निर्माण की पूर्णता के बीच गुप्त महत्वाकांक्षा के चलते योजनाएं दम तोड़ते दिखती है। उम्मीद इस बात की है कि सब कुछ सांय सांय होगा।
संजय दुबे




