TOBACCO;युवा उम्र में बढ़ रहा कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

विश्व तंबाकू निषेध दिवस; देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े, समय रहते छोड़ने पर जोखिम कम

रायपुर, विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रामकृष्णा केयर  अस्पताल, रायपुर के विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन पर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कैंसर तेजी से सामने आ रहे हैं।

इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने “तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश” थीम रखी है। इसका उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करने के लिए फ्लेवर्ड उत्पादों, ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, आकर्षक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी रणनीतियों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार मध्य भारत में धूम्रपान और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग अभी भी व्यापक है। भारत में करीब 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और हर साल 13 लाख से अधिक मौतें तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।

राजधानी रायपुर के डॉ. रवि जायसवाल, सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, ने कहा, “अधिकांश लोग मानते हैं कि धूम्रपान केवल फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है, जबकि सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है। सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें कम से कम 69 कैंसर पैदा करने वाले तत्व हैं। तंबाकू का सीधा संबंध मुंह, गले, स्वरयंत्र, फेफड़े, भोजन नली, पेट, लिवर, अग्न्याशय, बड़ी आंत, किडनी, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा और कुछ रक्त कैंसर से भी है।”

उन्होंने कहा कि देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े हैं। मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें कई मरीज युवा आयु वर्ग के हैं। लगातार खांसी, बलगम में खून, वजन घटना, मुंह के घाव, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

राजधानी रायपुर के डॉ. सुशील जैन, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, ने कहा, “आज बड़ी संख्या में युवा लगातार खांसी, सांस फूलना, फेफड़ों की क्षमता कम होना, अस्थमा और शुरुआती क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। लोगों को लगता है कि तंबाकू से नुकसान कई वर्षों बाद होता है, जबकि इसका असर बहुत पहले शुरू हो जाता है।” भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से प्रभावित हैं, जिसमें धूम्रपान प्रमुख कारणों में शामिल है।

डॉ. गिरीश अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, ने कहा, “ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और फ्लेवर्ड वेपिंग डिवाइस को सुरक्षित विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन इनमें निकोटीन की लत, फेफड़ों में सूजन और लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना रहता है।”

डॉक्टरों ने निष्क्रिय धूम्रपान के खतरों पर भी जोर दिया। उनके अनुसार घर के बच्चों और बुजुर्गों में सेकेंड हैंड स्मोक के कारण श्वसन संक्रमण, अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण भारत को हर वर्ष 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है।

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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