WILD LIFE ; उडीसा के माहौल में तेजी से ढल रहे विदेशी मेहमान ओरंगुटान, मूल देश का पता लगाने के लिए जल्द होगा डीएनए टेस्ट

0 दक्षिणपूर्वी एशियाई द्वीप समूह बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं

भुवनेश्वर, ओडिशा में रेस्क्यू कर लाए गए दुर्लभ प्रजाति के ओरंगुटान राज्य की जलवायु और वातावरण में तेजी से ढल रहे हैं। ओरंगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीवों में शामिल नहीं हैं और मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं । बोलचाल में इन्हें वनमानुष कहा जाता है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खूंटिया ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि इन ओरंगुटानों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। मंत्री ने बताया कि ओरंगुटानों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं, जो नियमित रूप से उनकी जांच कर रही हैं। निरंतर देखभाल के चलते उनके वजन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मौसम ओरंगुटानों के अनुकूल

वन मंत्री गणेश राम सिंह खूंटिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ओडिशा का मौसम इन ओरंगुटानों के अनुकूल साबित हो रहा है। यहां की जलवायु इन जीवों के प्राकृतिक आवास से मेल खाती है, जिससे वे आसानी से यहां समायोजित हो रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उनकी सेहत और खान-पान पर नजर रख रही है। उचित देखभाल और संतुलित पोषण के कारण उनके वजन में सुधार देखा गया है।

मूल देश का पता लगाने के लिए होगा DNA टेस्ट

मंत्री गणेश राम सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इन ओरंगुटानों के मूल स्थान का सटीक पता लगाने के लिए जल्द ही DNA परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ संपर्क स्थापित किया गया है। बहुत जल्द ओरंगुटानों के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। DNA रिपोर्ट आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इन्हें किस देश से तस्करी कर लाया गया था या ये मूल रूप से कहां के हैं।रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ओडिशा सरकार विस्तृत जानकारी भारत सरकार को सौंपेगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव नियमों के तहत आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

बिचित्रपुर वन क्षेत्र में पांच ओरंगुटान मिले

ओडिशा के बालासोर जिले के बडापाही गांव के पास बिचित्रपुर वन क्षेत्र में पांच ओरंगुटान मिलने से वन विभाग के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने पहली बार इन जानवरों को जंगल में देखा, जिसके बाद वन अधिकारियों को सूचना दी गई। टीम ने रेस्क्यू कर सभी पांचों ओरंगुटानों को सुरक्षित उदयपुर वन कार्यालय पहुंचाया।

नंदनकानन भेजने की तैयारी

ओरंगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीवों में शामिल नहीं हैं और मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। इसलिए इनके ओडिशा पहुंचने की वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है।  स्वास्थ्य जांच के बाद इन ओरंगुटानों को जंगल से लाकर नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया। इनमें तीन नर और दो मादा ओरंगुटान हैं। स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को क्वारंटाइन में रखा गया है। मामले की जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को भी दी गई है।

ओरंगुटान कहाँ रहते हैं?

ओरंगुटान केवल दक्षिणपूर्वी एशियाई द्वीप समूह के इंडोनेशिया और मलेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं । वे अपना लगभग पूरा जीवन पेड़ों पर ही बिताते हैं—पेड़ों की चोटियों पर झूलते हैं और सोने के लिए घोंसले बनाते हैं।ओरंगुटान की तीन प्रजातियाँ – बोर्नियन, सुमात्रन और तपनुली – दिखने और व्यवहार में थोड़ी भिन्न होती हैं। बोर्नियन और सुमात्रन प्रजातियों के शरीर पर घने, लाल रंग के बाल होते हैं; सुमात्रन ओरंगुटान के चेहरे पर बाल लंबे होते हैं और वे अपने बोर्नियन समकक्षों की तुलना में अधिक घनिष्ठ सामाजिक बंधन रखते हैं।

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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