छत्तीसगढ की सियासत ‘कही-सुनी’

रवि भोई

छत्तीसगढ़ की नई सरकार में सब कुछ सस्पेंस में

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय की सरकार 13 दिसंबर से अस्तित्व में आ गई है, लेकिन अभी तक कुछ भी साफ़ नहीं है। मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। नए मंत्रिमंडल को लेकर कयासों का बाजार ठंडा पड़ गया है। प्रोटेम स्पीकर के लिए पहले बृजमोहन अग्रवाल का नाम चल रहा था, लेकिन जिम्मेदारी मिली रामविचार नेताम को। कहते हैं सबसे वरिष्ठ विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाने की परंपरा है, लेकिन मुख्यमंत्री दूसरे किसी वरिष्ठ विधायक का नाम सुझा सकते हैं। कहा जा रहा है कि रमन कैबिनेट में रहे किसी नेता को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। नए लोगों को उपमुख्यमंत्री बना दिया गया है। उपमुख्यमंत्री बनाए गए अरुण साव और विजय शर्मा पहली बार के विधायक हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि साय मंत्रिमंडल में पहली बार के कई विधायकों को जगह मिल सकती है। इस कारण ओपी चौधरी से लेकर किरणदेव,नीलकंठ टेकाम,खुशवंत साहेब, गजेंद्र यादव, टंकराम वर्मा, उद्धेश्वरी पैकरा का नाम मंत्री के लिए चलने लगा है। 19 दिसंबर से तीन दिवसीय विधानसभा सत्र है, ऐसे में 18 दिसंबर को कैबिनेट के विस्तार का हल्ला है। खबर है कि 17 दिसंबर को राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन दिल्ली से लौट आएंगे। इसी दिन वे प्रोटेम स्पीकर को शपथ भी दिलाने वाले हैं।

क्या बसवराजू होंगे मुख्यमंत्री के सचिव

कहा जा रहा है कि 2007 बैच के आईएएस बसवराजू एस मुख्यमंत्री के सचिव बनाए जा सकते हैं। बसवराजू मूलतः कर्नाटक के रहने वाले हैं और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन ) बी एल संतोष के रिश्तेदार बताए जाते हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के गठन से लेकर ब्यूरोक्रेसी की नियुक्ति में बी एल संतोष का खासा दखल रहने वाला है। भूपेश बघेल के राज में बसवराजू उपेक्षित रहे। 2018 के चुनाव के वक्त वे रायपुर के कलेक्टर थे। फिर वे कुछ साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर चले गए। डेपुटेशन से लौटने के बाद उन्हें स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री के सचिव के लिए 2006 बैच के आईएएस पी दयानंद का नाम भी चर्चा में है। भूपेश बघेल के राज में दयानंद को भी कोई अच्छी पोस्टिंग नहीं मिली थी। भूपेश सरकार के एक मंत्री से दयानंद का छत्तीस का आंकड़ा था। जब जिले में थे तब भी उनकी पटरी नहीं बैठी थी।

पावर सेंटर की तलाश में अफसर

चर्चा है कि राज्य के वरिष्ठ अफसर नई सरकार में अच्छी पोस्टिंग के लिए पावर सेंटर की तलाश में लगे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा की नई सरकार में अफसरों की पोस्टिंग से लेकर नीतिगत निर्णय दिल्ली से होंगे या संघ के दफ्तर से। कहते हैं मलाईदार पदों में पोस्टिंग की चाहत रखने वाले बड़े अफसर मुख्यमंत्री के आगे-पीछे दिख रहे हैं, साथ में संघ के दफ्तर में भी उपस्थिति दे रहे हैं। पिछले दिनों पुलिस के तीन आला अफसरों का जागृति मंडल में जाना, इसका उदाहरण माना जा रहा है। कुछ दिनों पहले तक अफसर भाजपा के एक दिग्गज नेता के दरबार में हाजिरी देने पहुंच रहे थे, जब समझ में आ गया कि नई सरकार में उनकी नहीं चलनी है, तो अफसरों की भीड़ छटने लग गई। भाजपा कार्यालय से लेकर कुछ और जगहों पर आईएएस,आईपीएस,आईएफएस और दूसरे अफसरों की पोस्टिंग लिस्ट बनाए जाने की ख़बरें आ रही हैं। रमन सरकार में पावरफुल रहे एक अफसर के एक आलीशान होटल में दफ्तर खोलने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में पावर सेंटर को लेकर कुहासा छटेगा।

नई सरकार में पावरफुल रहेगी साउथ लॉबी

माना जा रहा है कि विष्णुदेव साय की सरकार में दक्षिण भारतीय अफसर ज्यादा ताकतवर रहेंगे। खबर है कि रिटायर्ड आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम मुख्यमंत्री के सलाहकार बनकर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। 1987 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस सुब्रमण्यम अभी नीति आयोग के सीईओ हैं। वे जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और भारत सरकार में कई पदों पर रह चुके हैं। 2005 बैच की आईएएस आर शंगीता को भी अच्छी पोस्टिंग मिल सकती है। भूपेश सरकार में आर शंगीता दरकिनार रही। साउथ के दूसरे अफसरों को भी नई सरकार में काफी तवज्जो मिल सकती है। नई सरकार में आईपीएस एसआरपी कल्लूरी को भी महत्व मिल सकता है। कल्लूरी और सुब्रमण्यम की कैमेस्ट्री अच्छी बताई जाती है। प्रमोटी आईएएस अफसरों का कद घट सकता है। जिलों में भी सीधी भर्ती वाले आईएएस बढ़ेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ विधायक लड़ेंगे लोकसभा

चर्चा है कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ विधायकों को पार्टी लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है। खबर है कि उन्हें संकेत भी दे दिए गए हैं। इस कारण उन्हें मंत्री भी नहीं बनाया जा रहा है। माना जा रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल को रायपुर, अजय चंद्राकर को महासमुंद और धरमलाल कौशिक या अमर अग्रवाल को बिलासपुर से लोकसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है। कहते हैं विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी भाजपा कुछ नए प्रयोग कर सकती है। अब देखते हैं क्या होता है।

कल्लूरी बन सकते हैं एडीजी नक्सल आपरेशन

चर्चा है कि 1994 बैच के आईपीएस शिवरामप्रसाद कल्लूरी एडीजी नक्सल आपरेशन हो सकते हैं। भूपेश सरकार ने कल्लूरी को पहले ईओडब्ल्यू का एडीजी, फिर परिवहन आयुक्त बनाया था। इसके बाद लूप लाइन में पटक दिया। वे पिछले तीन साल से एडीजी ट्रेनिंग हैं। सरगुजा इलाके में नक्सलियों के खात्मे के लिए कल्लूरी को याद किया जाता है। कल्लूरी ने बस्तर आईजी रहते बस्तर इलाके में नक्सलवाद को काफी हद तक कंट्रोल किया था। यह अलग बात है कि उनकी कार्यशैली को लेकर तीखी आलोचना हुई और उन पर कई आरोप भी लगे, लेकिन कल्लूरी के नाम पर नक्सलियों में दहशत कायम हो गया था। कहते हैं जिस तरह बस्तर में भाजपा नेताओं की टारगेट किलिंग हो रही है, उसे देखते हुए नई सरकार कल्लूरी को नक्सलियों के खात्मे की कमान सौंप सकती है।

हार के बाद कांग्रेस में रार

विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद कांग्रेस का अंतरकलह आसमान फाड़ने लगा है। हार का ठीकरा संगठन और बड़े नेताओं पर फोड़ने वाले पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह और डॉ विनय जायसवाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। अब पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल निशाने पर हैं। अग्रवाल को अपनी भड़ास निकालने पर नोटिस मिल गई है। नोटिस के जवाब पर जयसिंह के खिलाफ कार्रवाई टिकी है। बृहस्पत सिंह और विनय पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं। जयसिंह को टीएस सिंहदेव के खेमे का माना जाता है। बृहस्पत की टिकट काटने में टीएस सिंहदेव की अहम भूमिका मानी जाती है। बृहस्पत की जगह टीएस सिंहदेव ने ख़ास समर्थक को प्रत्याशी बनवाया। टिकट से वंचित पूर्व विधायक अब लामबंद होने लगे हैं। इस कारण आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर और झगड़े बढ़ने के आसार हैं। अपनी हार से दुखी होकर महंत रामसुंदर दास ने कांग्रेस को ही त्याग दिया। पूर्व विधायक मोहित राम भी कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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