निलंबन के 90 दिनों बाद विस्तारण आदेश जारी न करने पर बहाली माना जायेगा- हाई कोर्ट

बिलासपुर,  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी को विभिन्न आरोपों के तहत निलंबित कर दिया जाता है तो निलंबन अवधि के 90 दिनों के बाद आरोपों के संबंध में विस्तृत आदेश जारी करना होगा। विभाग प्रमुख अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो निलंबन आदेश निरस्त माना जाएगा और संबंधित कर्मचारी की बहाली मानी जाएगी।

शांतिपारा, भिलाई निवासी मनीषा पाठक, जिला चिकित्सालय, बेमेतरा में फार्मासिस्ट ग्रेड-दो के पद पर पदस्थ थी। उनके विरूद्ध कुछ शिकायतें प्राप्त होने पर कलेक्टर- बेमेतरा द्वारा मनीषा पाठक को सेवा से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के पश्चात् 90 दिनों के भीतर कलेक्टर – बेमेतरा द्वारा आरोप पत्र जारी कर दिया गया। परंतु अन्य कोई विभागीय कार्यवाही न होने एवं मनीषा पाठक को निलंबन से बहाल ना किये जाने को चुनौती देते हुए अधिवक्ता के माध्यम से निलंबन से बहाली हेतु हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के समक्ष रिट याचिका दायर की थी।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने रिट याचिका खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं घनश्याम शर्मा के जरिये डिवीजन बेंच के समक्ष रिट अपील दायर की है। मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अजय कुमार चौधरी विरूद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया के मामले में अपने फैसले में कहा है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी को सेवा से निलंबित किया जाता है उसके पश्चात् उसे आरोप पत्र जारी कर दिया जाता है। इसके बावजूद भी यह आवश्यक है कि अनुशासनात्मक अधिकारी निलंबन के 90 दिवस पश्चात् ठोस एवं विशेष कारण बताते हुए निलंबन के विस्तारण का आदेश जारी करें एवं यह भी उल्लेखित करना आवश्यक है कि उक्त कर्मचारी को लगातार निलंबित रखा जाना क्यों आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हुआ है उल्लंघन

अधिवक्ता पांडेय ने कहा कि याचिकाकर्ता के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का घोर उल्लंघन किया गया है। निलंबन के विस्तारण संबंधी आदेश जारी नहीं किया गया।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी एवं जस्टिस दीपक तिवारी के डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच द्वारा उक्त याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के विरूद्ध जारी निलंबन आदेश को निरस्त कर उसे सेवा में बहाल करने का आदेश जारी किया है। । इसके साथ ही चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच द्वारा उक्त आदेश को हाई कोर्ट की नजीर (ए.एफ.आर.) घोषित किया है।

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