राज्यपाल ने कहा-राष्ट्र एवं समाज की उन्नति में सहभागी बनें विद्यार्थी; कृषि विवि.के दीक्षांत समारोह में 12384 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई

0 कृषि शिक्षा, शोध एवं प्रसार से देश को नई दिशा प्रदान करें : मुख्यमंत्री, 62 स्वर्ण, 140 रजत एवं 23 कांस्य पदक भी प्रदान किए गए

रायपुर, भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी अर्थ व्यवस्था कृषि पर आधारित है। देश की प्रगति के लिए कृषि का विकास तथा किसानों की खुशहाली पहली प्राथमिकता है। कृषि ग्रजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थी नवीन कृषि अनुसंधानों तथा नवाचारों से देश के विकास को एक नई दिशा दे सकते हैं। विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग राष्ट्र व समाज की उन्नति में करें।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति विश्वभूषण हरिचंदन ने यह उद्गार आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नवम् दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे कृषि शिक्षा, शोध और प्रसार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थिपित करते हुए समाज एवं राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करें।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में 12 हजार 384 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी। जिनमें 9 हजार 908 स्नातक, 2 हजार 96 स्नातकोत्तर और 380 पीएचडी डिग्री धारी विद्यार्थी शामिल हैं, इनमें से लगभग साढ़ पांच हजार विद्यार्थियों ने भौतिक रूप से उपस्थित होकर उपाधि प्राप्त की। प्रावीण्य सूची के 62 छात्रों को स्वर्ण, 140 रजत और 23 कांस्य पदक प्रदान किये गये। दीक्षांत समारोह के दौरान शोभा यात्रा भी निकाली गई जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त, धरसिंवा विधायक, कुलपति, कुलसचिव एवं विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सदस्यगण, विद्या परिषद के सदस्यगण, प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण सहित अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल हुए।


कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने कहा कि लगातार बढती आबादी के भोजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायनिक उत्पादों और नई तकनीको ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। लेकिन रासायनिक खाद के अधिक उपयोग के परिणाम स्वरूप  मानव और मिट्टी के स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ा। इन समस्याओं के समाधान हेतु जैविक खेती को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कृषि के विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में अपना योगदान देने की आवश्यकता है। जैविक खेती के प्रयोग से किसान को ने केवल दूरगामी लाभ मिलते हैं, बल्कि उत्पादन लागत में भी 25-30 प्रतिशत की कमी आती है। भूमि की गुणवत्ता और उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ यह भूमि में कार्बन पृथक्करण में भी योगदान देता है। किसानो की आशा और विश्वास को पूरा करने के लिए सभी वैज्ञानिकां, शिक्षकों और विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करनी होगी। विश्वविद्यालय के ज्ञान के निरंतर प्रवाह से राज्य और देश के किसानो को और आम लोगों को लाभ मिलेगा।
समारोह के मुख्य अतिथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ में हर विधा की उच्च शिक्षा के अवसर तथा सुविधाऐं उपलब्ध कराई गई है। व्यवसायिक शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न संकायों में नवीन सुविधाओं तथा नवीन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ में विकसित हो रही संभावनाओं के लिए कुशल मानव संसाधन व बुनियादी अधोसंरचना तैयार हो। यह गौरव की बात है कि हमने पिछले 4 वर्षो में 19 कृषि से संबंधित नए महाविद्यालय प्रारम्भ किये हैं। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत 39 महाविद्यालय कार्यरत है।
विद्यार्थियों को दीक्षांत उद्बोधन देते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि आज विश्व के समक्ष दो बड़ी चुनौतियां है – जलवायु परिवर्तन तथा कुपोषण। इन चुनौतियों से निपटने के लिए हमें जलवायु परिवर्तन का सामना करने में सक्षम नवीन फसल किस्मों का विकास करना होगा। ऐसी किस्मों का विकास करना होगा जो अधिक तापमान सूखा, अधिक वर्षा तथा अन्य विपरीत जलवायविक परिस्थितियों के प्रति सहनशील हों तथा विपरीत परिस्थितियों में भी अधिक उत्पादन देने में सक्षम हों। इसी प्रकार हमें फसलों की अधिक पोषण देने वाली किस्मों का भी विकास करना होगा, जिनमें आवश्यक पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हों।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने विश्वविद्यालय की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि 20 जनवरी 1987 को स्थापित विश्वविद्यालय में कृषि एवं कृषि अभियांत्रिकी संकाय के अंतर्गत 36 महाविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 31 कृषि महाविद्यालय, 4 कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं 1 खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय हैं। छत्तीसगढ़ शासन ने 3 नये कृषि महाविद्यालय प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत 8 अनुसंधान केन्द्र एवं 27 कृषि विज्ञान केन्द्र भी कार्यरत हैं।

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