कानून व्यवस्था

NAXALITE; अब बचना नामुमकिन! SIA की राडार पर शहरों में छिपे नक्सली, रायपुर-कोरबा से गिरफ्तारी ने खोली थी पोल

रायपुर, 31 मार्च 2026 तक बस्तर के अबूझमाड़ के जंगलों से नक्सलियों को उखाड़ फेंकने के बाद टारगेट नक्सलियों के थिंक टैंक शहरी नक्सलियों पर है, अर्बन नेटवर्क को तोड़ने के स्टेट इन्वेटिगेशन एजेंसी जुट गई है. लंबे समय से ये अर्बन नेटवर्क नक्सलियों की ताकत बना हुआ था. ये मैसेज पास करने के अलावा नक्सलियों दवा समेत हर जरूरी सामान मुहैया कराते रहे हैं. शहरों में आम आदमियों के बीच में घुल मिलकर ये लंबे समय से नक्सली एजेंडे को अंजाम दे रहे है. हाल ही में कोरबा और रायपुर से ऐसे ही अर्बन नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की प्रोफाइल बनाने के लिये काफी दिनों से काम किया जा रहा था. वर्तमान में NIA की तर्ज पर जो SIA हमने बानाई है वो बहुत अच्छा काम कर रही है, रायपुर और कोरबा में भी ऐसे लोगों का नेटवर्क मिला है इस नेटवर्क को भी पूरी तरह से ध्वस्त करने का काम NIA कर रही हैं.

अर्बन नक्सल उस वर्ग को कहा जाता है, जो शहरों में रहते हुए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से नक्सलियों की मदद करता है. ये लोग विचारधारा फैलाने, युवाओं को जोड़ने, फंड और लॉजिस्टिक सपोर्ट जुटाने के साथ-साथ गिरफ्तार नक्सलियों को कानूनी मदद देने का काम करते हैं. पिछले दिनों पुलिस ने रायपुर के चंगोराभाठा से नक्सली दंपत्ति जग्गू उर्फ रमेश और कमला को गिरफ्तार किया है जो पिछले 5 सालों से रायपुर के अलग अलग जगहों पर अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे इसके अलावा नक्सली रामा किचाम को भी गिरफ्तार किया गया है जो कोरबा में कोयला खदान में मजदूरी करता था.

राजधानी रायपुर में नक्सलियों और उनके मददगारों की गिरफ्तारी का ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कुछ मामले सामने आ चुके है. पूरे प्रदेश की बात करें तो नारायणपुर, राजनांदगांव, गरियाबंद समेत 5 जिलों के शहरी इलाकों से गिरफ्तारी हो चुकी है. इन्हें लेवी वसूलने, नक्सलियों को गोलियां-बारूद, गन-मशीन और अन्य जरूरत की चींजे सप्लाई करने के आरोप में पकड़ा गया था.

नक्सल एक्सपर्ट वर्णीका शर्मा ने बताया कि नक्सलियों की जो सप्लाई लाइन है उसमें 2 टाइप के ऑर्गनाइजेशन काम करते हैं जिसमे पहला सिक्रेट सिक्रेट रिवोल्यूशनरी मॉस ऑर्गनाइजेशन और दूसरा ओपन रिवोल्यूशनरी मॉस ऑर्गनाइजेशन. तो जो सिक्रेट मॉस ऑर्गनाइजेशन आम लोगों के बीच में होते हैं इनको पहचान पाना बहुत मुश्किल होता है लेकिन इनकी गतिविधिया काफी संदिग्ध होती है

पिछले कुछ सालों में अर्बन नक्सलियों की गिरफ्तारियां
18 जून 2020 को कांकेर-राजनांदगांव पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलियों को वॉकी-टॉकी सेट सप्लाई करने के आरोप में राजनांदगांव और रायपुर के कारोबारियों को गिरफ्तार किया.

राजनांदगांव पुलिस ने 2020 में गुड़गांव के कारोबारी वरुण जैन को गिरफ्तार किया था. वरुण पर राजनांदगांव, कांकेर और अन्य क्षेत्रों में नक्सलियों को जूता, गोलियां, वर्दी, वायरलेस सेट, दवाई सहित अन्य सामान सप्लाई करने का आरोप था.

नारायणपुर पुलिस ने 10 जनवरी 2025 को प्रकाश सोनी को हथियार और विस्फोटक सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया. उसके पास से 3 मीटर कॉरडेक्स वायर, बिजली तार, स्कैनर (वॉकी-टॉकी), 20 *कारतूस और 3 डेटोनेटर बरामद हुए थे.

10 अगस्त 2024 को गरियाबंद पुलिस ने मैनपुर इलाके दबिश देकर 5 आरोपियों को पकड़ा था. जांच में सामने आया था कि पांचों आरोपी मैनपुर इलाके से 1 करोड़ से ज्यादा लेवी वसूलकर नक्सलियों को पहुंचा चुके थे. आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि तत्कालीन आईजी दीपक झा ने की थी.

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