नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने निकाय संबंधी कथित लापरवाही के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए निर्देश जारी किए जाने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने सोमवार को कहा कि युवा अधिवक्ताओं को केवल मीडिया प्रचार पाने के लिए जनहित याचिकाएं दायर नहीं करनी चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ”…इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने पेशे पर ध्यान दें, राष्ट्रीय मीडिया में इस तरह की बातें आना बंद होना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो इस पेशे में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं इन मामलों में बहुत रूढ़िवादी और दृढ़ हूं। दफ्तरों में काम करने, कानून सीखने के बजाय, आप निराधार याचिकाएं तैयार कर रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि आप सोशल मीडिया पर छा जाएंगे।” युवा वकीलों के लिए जरूरी है कि वो वकालत के शुरुआती वर्षों में पेशे पर ध्यान केंद्रित करें और कानून तथा मसौदा तैयार करने के कौशल सीखें।
सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकील की याचिका खारिज की
न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह ”अस्पष्ट और व्यापक दावों से भरी है, जिसमें ऐसे निर्देश मांगे गए हैं, जिनका पालन करना मुश्किल है। जनहित याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं है”। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रखरखाव में विफलताओं के कारण होने वाली मौतों की घटनाओं को रोकने के निर्देश संबंधी जनहित याचिका पर विचार करते हुए, पीठ ने शुरुआत में याचिकाकर्ता की वकील से पूछा कि जनहित याचिका के माध्यम से अदालत में आने के बजाय, इस विशिष्ट मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई।
वकील ने कोर्ट में क्या कहा?
वकील ने जवाब दिया कि यह मुद्दा ”राष्ट्रीय मुद्दा” बन गया है और यह किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। चीफ जस्टिस ने वकील से पूछा कि वह कितने समय से वकालत कर रही हैं। इस पर, वकील ने जवाब दिया कि वह चार साल से वकालत कर रही हैं। इसके बाद, चीफ जस्टिस ने युवा वकीलों को सलाह दी कि वे केवल प्रचार के लिए याचिकाएं दायर करने के बजाय वरिष्ठों के मार्गदर्शन में पेशे को सीखने में समय व्यतीत करें।







