यह बताने की जरूरत नहीं है कि अधिकांश घरों में भोजन नाश्ता चाय निर्माण के लिए घरेलू गैस पर पूर्णतः निर्भरता है। सालों से घरेलू गैस की आपूर्ति इतनी निर्बाध रही है कि शायद ही कभी लंबी कतार गैस एजेंसियों के सामने दिखी हो।
हाल ही इजरायल अमेरिकी ईरान युद्ध के चलते घरेलू गैस की आपूर्ति लड़खड़ा गई है। आवश्यकता की पूर्ति के संभावित प्रभाव के चलते हिंदुस्तान सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए बुकिंग व्यवस्था को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। इसका सीधा अर्थ ये है कि गैस उपभोक्ता को चार दिन अतिरिक्त रूप से इंतजार करना पड़ेगा या गैस के उपयोग को नियंत्रित करना पड़ेगा।
हिंदुस्तान में एकल परिवार जिसमें आज की स्थिति में माता पिता सहित दो संतान के अलावा एक अतिरिक्त सदस्य के रूप में पांच सदस्य की गणना होती है। सरकार जब भी आम जनता को कोई सार्वभौमिक सुविधा प्रदान करती है तो अधिकतम के स्थान पर न्यूनतम सुविधा का मापदंड होता है। घरेलू गैस का दैनिक उपयोग कैसे होता है इसको जानना जरूरी है।
एक घर में दो बार खाना दो बार चाय निर्माण और रविवार या अवकाश को एक बार नाश्ता निर्माण की गणना कर आंकलन किए जाने पर 500 ग्राम गैस प्रतिदिन खर्च होता है। घरेलू गैस सिलेंडर में 14. 2 किलो गैस होता है। इस आधार पर 28 दिन चलने लायक गैस की आपूर्ति की जाती है।
कोई उपभोक्ता असामान्य रूप से दो बार खाना और चाय के अलावा गैस का अतिरिक्त उपयोग करेगा तो सिलेंडर में भरा गैस 28 दिन के बजाय 20 -21 दिन में ही खत्म हो जाएगा। इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना कतई उचित नहीं है।
अधिकांश उपभोक्ताओं ने दो घरेलू गैस सिलेंडर कनेक्शन लिए हुए है। उज्जवला योजना अंतर्गत एक सिलेंडर दिया गया है। शहरी क्षेत्र में बुकिंग के लिए वर्तमान में 25 और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतराल निर्धारित है। माना जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र में भौगोलिक आधार पर केवल रोटी या चांवल बनाया जाता है, नाश्ते का चलन नहीं है। इस कारण गैस की खपत कम होती है।
होटल सहित औद्योगिक क्षेत्र में व्यवसायिक गैस सिलेंडर प्रदान किए जाने की व्यवस्था है।सरकार ने गैस कंपनियों को घरेलू और समांतर गैस वितरकों को व्यावसायिक सिलेंडर आपूर्ति का प्रमुख रूप से जिम्मा दिया है। वर्तमान में युद्ध के कारण घरेलू से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र में व्यवसायिक गैस की आपूर्ति लड़खड़ा गई है। इस कारण होटलों में नाश्ता खाना के लिए विकल्प के रूप में डीजल भट्टी का उपयोग हो रहा है।
युद्ध शीघ्र खत्म नहीं होता है तो निश्चित रूप से गैस की आपूर्ति बाधित होगी ये राष्ट्रीय संकट है जिसमें घबराहट के बजाय संयम की जरूरत है। देश पर संकट आए तो नागरिकों को अपने तरफ से सहयोग करना चाहिए। जमाखोरी और कालाबाजारी पर नियंत्रण केवल सरकार का काम नहीं है आम नागरिक अगर सजग रहे, सहयोग करे तो नियंत्रण करना आसान होगा।नागरिकों को केवल अधिकार के प्रति सजग होने के साथ साथ कर्तव्य के प्रति भी जवाबदेह होना चाहिए।
स्तंभकार-संजयदुबे







