RESIGN; महाभियोगा के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा,अत्यंत वेदना के साथ जज पद से इस्तीफा दे रहा हूं 

0 जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में क्या लिखा?

नई दिल्ली,  जस्टिस यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह तत्काल प्रभाव से अपने पद से हट रहे हैं और अपने पत्र में उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया। उनका इस्तीफा, कैश बरामदगी को लेकर चल रहे विवाद और महाभियोग की प्रक्रिया के बीच आया है।

राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में क्या लिखा?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने 9 अप्रैल के पत्र में जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह अपने फैसले के पीछे के कारणों से राष्ट्रपति के गरिमापूर्ण पद पर बोझ नहीं डालना चाहते। जस्टिस वर्मा ने लिखा, “हालांकि, मैं आपके गरिमामय पद पर उन कारणों का बोझ डालना नहीं चाहता, जिनकी वजह से मुझे यह पत्र लिखना पड़ा है; फिर भी, अत्यंत वेदना के साथ, मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद से तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए एक सम्मान की बात रही है।”

आवास पर भारी मात्रा में कैश बरामद किए जाने के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। जस्टिस वर्मा ने पिछले साल 5 अप्रैल को इलाहाबाद हाई कोर्ट में शपथ ली थी और उसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस जांच के तहत रखा गया था, जिसमें आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।

जस्टिस के खिलाफ महाभियोग की मांग

जस्टिस वर्मा का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एक आंतरिक जांच और संसद में महाभियोग की कार्रवाई की संभावना दोनों चल रही है। लोकसभा स्पीकर ने 146 सांसदों के साइन किए हुए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था और आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली कमेटी बनाई थी।

कैश बरामदगी और जांच का घटनाक्रम

  • असल में 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोररूम में आग लगने के बाद, वहां से बेहिसाब नकद बरामद हुआ था।
  • घटना की सूचना पर पहुंची दमकल गाड़ियों के कर्मचारियों को वहां से भारी मात्रा में नकद मिला। उस समय जज अपने आवास पर मौजूद नहीं थे।
  • इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक आंतरिक जांच शुरू की, जिसके नतीजों के आधार पर संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • इस प्रक्रिया के तहत, एक संसदीय समिति ने अब तक कई सुनवाई की हैं और दस्तावेजों की जांच की है।
  • समिति को दिए अपने जवाब में, जस्टिस वर्मा ने इस बात से इनकार किया कि बरामद किया गया कोई भी नकद उनका था; साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके आवास से ऐसी कोई बरामदगी हुई ही नहीं थी। उन्होंने यह बात भी दोहराई कि आग लगने के समय वे वहां मौजूद नहीं थे।
  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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