
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके आबकारी विभाग के हेड कांस्टेबल को राहत देते हुए गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जुलाई 2027 में अधिवार्षिकी आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने वाला है और ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले उनकी पसंद अथवा गृह जिले में पदस्थापना का लाभ दिया जाता रहा है। इसलिए इस मामले में भी उसे यह लाभ दिया जाना चाहिए।
यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने आबकारी हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट, की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में अस्थायी आधार पर सेल्समैन के रूप में हुई थी। बाद में उसे आबकारी कांस्टेबल के पद पर नियमित किया गया और कोरबा में पदस्थ किया गया।
वर्ष 2014 में उसका तबादला कोरबा से बिलासपुर किया गया। इसके बाद 24 जून 2022 को उसे बिलासपुर से रायगढ़ स्थानांतरित किया गया, जहां वह लगातार पदस्थ है। नेल्सन लवेट ने 23 अगस्त 2022 को अभ्यावेदन देकर बताया था कि उसकी पत्नी का लगातार इलाज चल रहा है और स्वास्थ्य काफी कमजोर है। इसके बाद 11 अगस्त 2023 को उसे आबकारी हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति मिली और रायगढ़ में ही पदस्थ किया गया।
गृह जिले बिलासपुर में पदस्थापना के लिए उसने तीन जुलाई 2024, 22 सितंबर 2025 और चार अक्टूबर 2025 को भी अभ्यावेदन दिए। इसके बाद उसने हाई कोर्ट में 2025 में याचिका दायर की थी। 20 नवंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को उसके अभ्यावेदनों पर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके पालन में उसने 27 जनवरी 2026 और 21 मई 2026 को फिर अभ्यावेदन दिए। नौ जुलाई 2026 को भी अभ्यावेदन दिया गया, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।
राज्य ने ट्रांसफर नीति लागू होने से किया इन्कार
राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि पांच जून 2025 की स्थानांतरण नीति पुलिस, आबकारी, परिवहन, वाणिज्यिक कर और शिक्षा विभाग पर लागू नहीं होती। इसलिए नीति की कंडिका 3.12 के तहत गृह जिले में पदस्थापना का दावा नहीं किया जा सकता। राज्य ने यह भी कहा कि किसी कर्मचारी को उसकी पसंद के स्थान पर पदस्थ करने का कोई निहित या प्रवर्तनीय अधिकार नहीं है और यह सक्षम प्रशासनिक अधिकारी के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
हाई कोर्ट ने कहा- सेवानिवृत्ति करीब है, राहत मिलनी चाहिए
कोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता रायगढ़ जिले में आबकारी हेड कांस्टेबल के रूप में कार्यरत है और जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने वाला है। गृह जिले बिलासपुर में पदस्थापना के लिए वह कई बार अभ्यावेदन दे चुका है और लंबे समय से अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रख रहा है। कोर्ट ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि कंडिका 3.12 का लाभ उसे नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर पहुंच चुके विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को उनकी पसंद अथवा गृह जिले में पदस्थापना का लाभ दिया गया है। ऐसे में याचिकाकर्ता को भी इसी आधार पर लाभ मिलना चाहिए।






