
रायपुर, चुनाव नजदीक आते ही रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू को 30 महीने बाद पहली बार बिरगांव निगम के कामों की समीक्षा की याद आई। लेकिन जिस निगम के कामों की समीक्षा की गई, उसी निगम के MIC सदस्यों/विभागीय अध्यक्षों को बैठक से बाहर क्यों रखा गया?
नगर निगम बिरगांव रायपुर के -लोक निर्माण विभाग प्रभारी इकराम अहमद ने यह सवाल किया है। उन्होंने बताय कि गत दिवस भाजपा के नेता प्रतिपक्ष को बैठक में बुलाया गया, लेकिन जिम्मेदार MIC सदस्यों को नहीं। क्या इसलिए कि MIC सदस्य ठेकेदारों की मनमानी और सरकार की नाकामी के सवाल सामने रख देते?
लोक निर्माण विभाग प्रभारी इकराम अहमद ने आगे बताया कि बिरगांव के विकास की बात करें तो निगम क्षेत्र मे पानी की समस्या को देखते हुये पूर्व विधायक सत्यनारायण शर्मा की मांग पर कांग्रेस सरकार ने 104 करोड़ की राशि पानी की समस्या को दूर करने स्वीकृत की थी। इसी राशि से बिरगांव निगम के इतिहास में पहली बार शहर को टैंकर मुक्त कर हर घर तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की दिशा में बड़ा काम हुआ। लगभग 10–15 प्रतिशत काम ही शेष था, लेकिन विधायक मोतीलाल साहू के 30 महीने के कार्यकाल के बाद भी कुछ वार्डों में आज तक पानी नहीं पहुंचना बेहद चिंता की बात है।
वहीं मोती सागर तालाब सौंदर्यीकरण का काम बंद, उरकुरा अंबेडकर भवन का काम बंद, वार्डों में लाइट मरम्मत के लिए मिस्त्री नहीं, बार-बार मरम्मत के बावजूद बोर खराब, सफाई कर्मचारियों की कमी से वार्डों की सफाई व्यवस्था बदहाल और महापौर-पार्षद निधि नहीं मिलने से छोटे-छोटे विकास कार्य भी प्रभावित हैं। उन्होंने सवाल किया है कि 30 महीने तक सत्ता में रहने के बाद भी अगर पानी, सफाई, बिजली और विकास के बुनियादी काम अधूरे हैं, तो समीक्षा बैठक किस बात की?







