रायपुर, छत्तीसगढ़ में लगभग दो हजार करोड के आबकारी घोटाले में एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) ने 2013 से यानी पिछली सरकार के कार्यकाल से लेकर अब तक हुए आबकारी घपले की जांच शुरू कर दी है। तब से अब तक जिलों से लेकर आबकारी मुख्यालय में पदस्थ 80 से ज्यादा अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। सभी को पूछताछ के लिए आज बुधवार को ईओडब्लू-एसीबी के दफ्तर में बुला लिया गया है। नोटिस ज्यादातर ऐसे अधिकारियों को दिए गए हैं, जो तब डीईओ, गोदाम इंचार्ज, उपायुक्त और आयुक्त के पद पर थे।
ईओडब्लू इस आरोप की जांच कर रहा है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में आबकारी विभाग के अफसरों ने डिस्टलरी वालों के साथ मिलकर कथित भ्रष्टाचार किया। फैक्ट्री से शराब सीधे दुकानों में पहुंचाई और वहां से बेच दी गई। जबकि नियमानुसार फैक्ट्री से शराब सरकारी वेयरहाउस में जानी थी, फिर वहां से मांग के अनुसार दुकानों में भेजी जानी थी। मिली जानकारी के अनुसार ईओडब्लू ने अभी सिर्फ आबकारी अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इसमें रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद, मुंगेली समेत सभी जिलों में पूर्व-वर्तमान में पदस्थ अधिकारी हैं।
ईओडब्लू ने नोटिस देने के पहले आबकारी विभाग से 2013 से लेकर अब तक जिलों में पदस्थ अधिकारियों का नाम, पता की सूची मांगी थी। यह भी पूछा था कि तब कौन-कौन शराब की सप्लाई कर रहे थे? प्लेसमेंट एजेंसी और ठेकेदार कौन थे? किन डिस्टलरीज से शराब की सप्लाई हुई और बॉटलिंग कौन करता था।
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों से पूछताछ के बाद ईओडब्लू ने प्लेसमेंट एजेंसियों, ठेकेदारों और अंत में डिस्टलरी संचालकों से पूछताछ की तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि इस मामले में डिस्टलरी संचालकों पर केस भी दर्ज हो सकता है। जो अधिकारी गड़बड़ी में लिप्त मिलेंगे, उनकी संपत्ति की जांच के अलावा आय से अधिक संपत्ति का केस भी दर्ज किया जा सकता है।







