
रायपुर, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में बरसों से चल रहे करोड़ों रुपये के प्रिंटिंग और होर्डिंग घोटाले पर बड़ी कार्रवाई की है। संवाद में पिछले 25 सालों से प्रिंटिंग विभाग के इंचार्ज रहे सब्यसाची कर को बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं काम में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है। उन्हें सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उनको सस्पेंड भी किया जा सकता है। राज्य बनने के बाद से ही संवाद में अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रहे इस काले खेल पर यह पहली सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई मानी जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि साल 2011 में ही एक जांच कमेटी ने सब्यसाची कर की नियुक्ति को अवैधानिक ठहरा दिया था, लेकिन विभागीय साठगांठ के चलते तब उनकी फाइल दबा दी गई थी। अफसर को हटाने के साथ ही होर्डिंग माफियाओं पर भी नकेल कसी गई। ये माफिया तय समय से पहले ही सरकारी होर्डिंग निकालकर वहां प्राइवेट विज्ञापन लगा देते थे और बिना किसी चेकिंग के पूरे सरकारी बिल का पैसा निकाल लेते थे, जिस पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
बताया गया है कि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा 33.74 करोड़ रुपये के पुस्तक घोटाले का हुआ। दरअसल समग्र शिक्षा विभाग की किताबें छापने का जिम्मा संवाद को मिला था, जिसके तहत 6 फरवरी 2026 को 10 प्रकाशकों को कार्यादेश जारी किया गया। लेकिन इनमें से 8 प्रिंटरों ने किताबों की साइज छोटी कर दी, कम जीएसएम का हल्का पेपर इस्तेमाल किया और तय संख्या से कम किताबें छापीं।
10 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान दावा
जानकारों के मुताबिक इस हेराफेरी से सरकार को कम से कम 10 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान दावा किया गया है। प्रिंटरों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने विभाग के अगले टेंडर पर पूरी तरह कब्जा जमाने के लिए चंदा इकट्ठा कर अपना ऑफिस खोल लिया था। लेकिन आपस में ही विवाद होने के चलते उनकी इस साजिश का भंडाफोड़ हो गया। चिकायत मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंचा, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर संवाद के शीर्ष अधिकारियों ने उस टेंडर को तत्काल निरस्त कर दिया।
साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती
बताया गया है कि प्रिंटरों के इस काले कारनामे को पकड़ने के लिए संवाद के सीईओ रजत बंसल ने गोपनीय रणनीति अपनाई। पहले प्रिंटर सही साइज और अच्छी क्वालिटी का सैंपल जमा कर देते थे और बाद में जिलों में घटिया माल भेजकर अपना पूरा पेमेंट पास करवा लेते थे। लेकिन इस बार ट्रांसपोर्टिंग के दौरान बीच रास्ते में गाड़ियों की गोपनीय सैंपलिंग कराई गई, जिसमें 8 प्रिंटर रंगे हाथों पकड़े गए। इस धांधली पर कड़ा रुख अपनाते हुए पहली बार प्रिंटरों के बिल से सीधे साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती कर ली गई, जिससे माफियाओं में हड़कंप मच गया। केवल ठेकेदारों पर ही नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही पर भी गाज गिरी है। जनसंपर्क आयुक्त ने काम में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।







