CGPSC गड़बड़ी की जांच CBI से कराने की मांग; ओपी चौधरी बोले- हनुमान सिंह के सवाल पर जवाब वीरनारायण सिंह पर और नंबर भी मिले
रायपुर, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ी के दावे लगातार भाजपा कर रही है। अब CBI जांच की मांग उठाई गई है। भाजपा के महामंत्री ओपी चौधरी ने इसे लेकर पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि परीक्षा में बड़ी धांधली हो रही है। इसकी जांचकर दूध का दूध और पानी का पानी किया जाना चाहिए।
भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री चौधरी ने मंगलवार को एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश के लाखों युवा अपने सपनों और माता-पिता व परिजनों की उम्मीदों को आकार देने गाँव-गाँव से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों में आते हैं। इसके लिए परिवार की जमा-पूंजी, खेती-बाड़ी बिक जाती है। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस और उसकी प्रदेश सरकार ने उनको भी कहीं का नहीं छोड़ा है।
भाजपा नेताओं के हाथ PSC की आंसरशीट लगी है। चौधरी ने इसे दिखाते हुए बताया कि परीक्षा में 8 अंक का एक प्रश्न यह था कि 1857 की क्रांति में वीर हनुमान सिंह के योगदान का वर्णन कीजिए। एक अभ्यर्थी ने उत्तर में हनुमान सिंह की जगह वीर नारायण सिंह लिखा। दोनों ही हुतात्माओं का योगदान हमारे लिए अमूल्य धरोहर है।
चूँकि परीक्षा में वीर हनुमान सिंह के बारे में प्रश्न था, इसलिए उत्तर भी उनके बारे में दिया जाना था। उन्हें छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहा जाता है। लेकिन उस अभ्यर्थी को गलत उत्तर दिए जाने के बाद भी इसमें साढ़े 5 अंक दिए गए जबकि जिस अभ्यर्थी ने वीर हनुमान सिंह के बारे में उत्तर लिखा, उसे सिर्फ 4 अंक दिए गए।
भाजपा प्रदेश महामंत्री चौधरी ने कहा कि इसी तरह ऑन्सर शीट का मूल्यांकन एक्जामिनर, डिप्टी हेड एक्जामिनर और हेड एकाजामिनर, इन तीन स्तरों पर होता है, लेकिन इसमें तीनों मूल्यांकन के अंक समान ही दिए गए हैं। इस पर सवाल उठाते हुए चौधरी ने कहा कि यह कैसे संभव है कि तीनों स्तर पर मूल्यांकन में एक जैसे समान अंक दिए जाएँ? या तो सभी स्तरों पर मूल्यांकन नहीं हुआ है या फिर इसमें लापरवाही हुई है।
पीएससी में गड़बड़ियां रमन राज में होती थी, कांग्रेस सरकार में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही
पीएससी को लेकर भाजपा स्तरहीन राजनीति कर रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भूपेश सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में 5 सालों में 80 हजार से अधिक सरकारी नौकरियों में भर्ती से बौखलाई भाजपा भर्ती प्रणाली में सवाल खड़ा कर अपनी खीझ निकाल रही है। कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दों की कमी से जूझ रही भाजपा राज्य लोकसेवा आयोग की छवि को खराब करने का काम कर रही है। अपनी राजनैतिक दुकान चलाने के लिये भाजपा प्रदेश के युवाओं की विश्वसनीय संस्था पर गलत आरोप लगा कर राज्य में भ्रम का वातावरण बना रही है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सरकार ने पीएससी की पारदर्शिता समयबद्धता और निष्पक्षता को बनाये रखने का पुख्ता इंतजाम किया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने रमन राज में 15 साल के कुशासन को भी भोगा है। रमन सरकार के दौरान 2003 और 2005 में पीएससी भर्ती घोटाला भी सर्वविदित है। 2003 के मामले में अभ्यर्थियों के शिकायत पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा था कि उक्त भर्ती में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी साफ दिख रही है, जांच और स्कैलिंग में षडयंत्र पूर्वक किए गए गड़बड़ी को लेकर उच्च न्यायालय ने कड़े कमेंट किए और उस सूची को निरस्त कर मानव विज्ञान की कॉपीयों को पुनः जांचने और फिर से स्कैलिंग कर नई सूची जारी करने का आदेश दिया था। रमन सरकार के दौरान उक्त भर्ती की जांच में यह भी पाया गया कि किसी अभ्यर्थी को 50 नंबर के पूर्णांक के आधार पर तो किसी को उपकृत करने 75 नंबर के पूर्णांक के आधार पर कापियां जांची गई थी। वर्ष 2005 के पीएससी भर्ती के मामले में सभी चयनित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था।पीएसी के तत्कालीन चेयरमैन अशोक दरबारी सस्पेंड हुए, बिलासपुर हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने पूरी नियुक्ति सूची को ही निरस्त कर दिया था, लेकिन रमन सरकार की मिलीभगत से सुप्रीम कोर्ट से वह सूची बहाल करा दी गई। आज भी 2005 का मामला न्यायालय में लंबित है। स्थानीय युवाओं के हक और हित का गला घोटना रमन सरकार का चरित्र था।