केरल देश के अरब सागर के किनारे का राज्य है। अरब सागर की प्रवृत्ति असहज है, अनिश्चित है।कब धीमी गति की लहर अपना स्वभाव बदल तीव्र हो जाए, पता नहीं चलता। कब उम्मीद के विपरीत सुस्त लहर अपनी गति बढ़ा कर उफन जाए ये भी ज्ञात नहीं होता।इस स्वभाव को क्रिकेट के एक बल्लेबाज में देखा गया।
ये बल्लेबाज 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अपने टी ट्वेंटी मैच में पदार्पण करता है, 19 रन बनाता है और अदृश्य हो जाता है। पांच साल की अंतरराष्ट्रीय गुमनामी में ये बल्लेबाज प्रथम श्रेणी के घरेलू आईपीएल में खेलते रहता है। पांच साल बाद श्रीलंका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फिर मौका मिलता है लेकिन यादगार पारी का अभाव रहता है। हां, आयरलैंड के खिलाफ 77 रन की पारी हल्की सी उम्मीद जगाती है लेकिन वेस्ट इंडीज और जिम्बाब्वे के खिलाफ इस बल्लेबाज का बल्ला खामोश ही रहता है। आने वाले 2022 से लेकर 2024 के सालों में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 86 रन, आयरलैंड के विरुद्ध 108रन, बांग्ला देश के सामने 111रन और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 109 और 107रन की पारी का तड़का जरूर लगता है।इसके बाद इंग्लैंड,एशिया कप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के विरुद्ध इस बल्लेबाज का प्रदर्शन निराशा ही जगाती
रही। आगामी 20 मैच में कुल जमा 268 रन बनते है। केवल एक अर्धशतक इसमें शामिल होता है। फिर आता है टी ट्वेंटी का विश्वकप। इस बल्लेबाज को लीग राउंड में दो बार मौका मिलता है। 22 और 24 रन का योगदान उत्साह जनक नहीं कहा जा सकता था। अचानक ही फिजा बदलती है और दस सालों से उंगलियों में गिने जाने वाले बढ़िया प्रदर्शन के बाद तीन लगातार ऐसी पारी खेली जाती है जिससे देश दोबारा विश्व विजेता बन कर खड़ा हो जाता है। अतीत की सारी विफलता पर सफलता का ऐसा आवरण चढ़ता है कि इस बल्लेबाज सहित सारा देश सालों इस प्रदर्शन को याद कर अपना गला रुंधा सकता है, आंखे नम कर कर सकता है, खुशी में रो सकता है और जीत के जश्न को याद करे तो नाच सकता है, गा सकता है।
ये बल्लेबाज कोई और नहीं केरल के विझियम नगर का महानायक हो चुका संजू सैम्सन है। अरब सागर के तट पर बसा ये नगर संजू सैम्सन का वह ठिकाना है जो दिल्ली के बाद दूसरा आशियाना बना था। संजू सैम्सन के पिता दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल थे। दिल्ली क्रिकेट में दिग्गजों के चलते संजू सैम्सन को सफलता नहीं मिली तो पिता ने अनिवार्य सेवा निवृति लेकर केरल लौट गए,इस उम्मीद के साथ कि छोटे राज्य से शायद मौका मिल जाए।पिता के दूर की सोच काम आई। दादा जो अरब सागर में मछली पकड़ने का काम करते वे संजू को समझाते।”समुद्र जिसका व्यवहार अनिश्चित होता है।आती जाती लहरों में सब कुछ होता है। मछुवारे उम्मीद के साथ समुद्र में जाता है कभी जाल में भर मछली आती है तो कभी खाली जाल लेकिन मछुवारा उम्मीद के साथ अगले दिन फिर समुद्र में जाता है।” यही दर्शन संजू सैम्सन के काम आई और 2015 से 2025 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सागर में वे गोते लगाते रहे, डूबते रहे, उबरते रहे। इस बार के विश्व कप के शुरूआती दो मैच में 22 और 24 रन बनाए तो सामान्य बुद्धि के दर्शकों को लगा कि संजू सैम्सन विश्वसनीय नहीं है, उनकी बॉडी लैंग्वेज भी कही से आक्रामक होने का भाव नहीं दिखाती है लेकिन वेस्ट इंडीज के खिलाफ आठ चौके और सात छक्के की मदद से बने नाबाद 97 रन ने संजू सैम्सन पर थोड़ा भरोसा तो कायम किया।इंग्लैंड के खिलाफ सेमी फाइनल में 89 रन और फाइनल मे न्यूजीलैंड के खिलाफ फिर से 89 रन ने प्रतिद्वंदियों के सारे समीकरण बिगाड़ दिए।
संजू सैम्सन, प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बन गए। ये प्रदर्शन सपाट विकेट पर है असली परीक्षा तो विदेश में होनी है जहां स्विंग और कट के साथ बॉल आती है। संजू सैम्सन अब उम्मीदों के शीर्ष बन गए है। आने वाले सालों में वे ओपनर भी रहेंगे और विकेटकीपर भी लेकिन क्रिकेट के दो बड़े फॉर्मेट टेस्ट और वनडे में उनकी जगह में ईशान किशन है, ऋषभ पंत है। ऐसे में संजू सैम्सन को कड़ी प्रतिद्वंदिता मिलना है याने। एक बार फिर अरब सागर सामने है
केरल, मसालों का राज्य है, प्राकृतिक औषधियों का राज्य है, देश का पहला साक्षर राज्य है।अब संजू सैम्सन का भी राज्य है और केरल को क्रिकेट के नाम पर टीनू योहानन, श्रीसंत,संदीप वारियर के राज्य के नाम से भी जाना जा सकता है।
स्तंभकार-संजयदुबे







