बरसात के मौसम के आने के साथ ही सांपों के निकलने, देखने, उनके काटने से बच और मर जाने की खबरें पढ़ने सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि जब तक सांप को छेड़ा न जाए या सांप को ये महसूस न हो कि इंसान उसका नुकसान नहीं करना चाहता, आमतौर पर सांप नहीं काटता है। अब अगर इंसान ही सांप को हथियार के रूप में उपयोग कर किसी इंसान को मार दे तो इसे क्या कहा जाएगा? मेरठ में हाल ही में एक घटना घटी जिसमें जहरीली पत्नी ने अपने पति को सांप से कटवा कर हत्या कर दी। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में जहरीले सांप के काटने से बिलासपुर जिले में पिछले तीन साल में 431 मौत ने विधायक सुशांत शुक्ला के कान खड़े कर दिए। जांच में अनोखी बात सामने आई कि सामान्य मौत से मरने वालों को सर्प दंश से मृत्यु प्रमाणित कर चार लाख का सरकारी मुआवजा का बंदरबांट करना था। इस मामले में सिम्स बिलासपुर की महिला चिकित्सक डा प्रियंका सोनी के द्वारा फर्जी रिपोर्ट बनाना शामिल था, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मुआवजा लेने देने में शामिल एसडीएम कार्यालय के तीन क्लर्क सहित अनेक लोग गिरफ्त में है।
इंसान अपने स्वार्थ और आर्थिक लाभ के लिए सदियों से जानवरों को मारते आ रहा है।इसके चलते जंगल का राजा कहे जाने वाले शेर की संख्या को संरक्षित करना पड़ रहा है। हाथी, भालू भी मारे जाते है। सांप के जहर को नशे के रूप में उपयोग करने के लिए जहरीले सांपों का व्यापार हो रहा है।इससे भी दुखद बात ये है कि साँप को हथियार के रूप में उपयोग कर हत्या की जा रही है, मुआवजा लिया जा रहा है।
बीते सालों में असफल विवाह, विवाह के बाद पर स्त्री पुरुष से प्रेम के मामले आम हो गए है। बहुत से स्त्रियों का आर्थिक रूप आश्रित होना अथवा खुद पर निर्भरता ने उन्हें विद्रोही बना दिया है। परिवार की बुनियादी जरूरत के रूप विवाह संस्था के दो प्रमुख पक्ष वर वधु जो विवाह के बाद पति पत्नी बनते है उनमें सामंजस्य बन पाना कठिन होते जा रहा है। परिवार न्यायालय में तलाक के मामलों की बाढ़ आ गई है। इससे भी आगे जाकर यदि महिलाएं हत्या जैसे गंभीर अपराध की तरफ बढ़ रही है तो ये परिवार के विघटन की ओर का गंभीर संकेत है। इंदौर की सोनम रघुवंशी हो या पुणे की सिया गोयल या मेरठ की दामिनी हो या मुस्कान,अंजली, गुरुप्रीत, रवीता या कोमल हो, इन लोगों ने हत्या करवाने की साजिश रच कर अंजाम दिया है। इस प्रकार की बढ़ती घटनाओं से बने बनाए परिवार सहित भविष्य में बनने वाले परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
सांप को हथियार के रूप में उपयोग कर हत्या करवाने के अलावा निर्दोष सांप के काटने से सुनियोजित षड़यंत्र का छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में चार लाख का सरकारी मुआवजा पाने का खेल विस्मयकारी है। तीन साल में 431 सर्प दंश से मृत्यु का मामला बना कर करीब सत्रह करोड़ रूपये के गबन किया जाना भी अद्भुद है। इसमें बिलासपुर सिम्स के डा प्रियंका सोनी सहित एसडीएम कार्यालय के अनेक लोगों का शामिल होना ये सिद्ध करता है कि बेजुबान जानवर के नाम का कितना दुरुपयोग हो रहा है।
विधायक सुशांत शुक्ला बधाई के पात्र है जिन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया और दोषी लोगों के चेहरे बेनकाब किए।
स्तंभकार-संजयदुबे







