रायपुर, ईडी ने भारतमाला परियोजना घोटाले में 12.78 करोड़ रुपए की 62 चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया। इसमें 8.09 करोड़ की जमीन और 4.69 करोड़ रुपए के शेयर एवं म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स शामिल हैं। उक्त संपत्तियां भारतमाला परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण करने वाले अभनपुर के जमीन दलाल जयप्रकाश गांधी सहित 13 आरोपियों की हैं।
जय प्रकाश गांधी और उनके परिजनों को 56.76 लाख रुपए के वैध हक के बदले 9.83 करोड़ रुपए का मुआवज़ा मिला। इससे 9.27 करोड़ रुपए की अपराध से कमाई हुई। इस अवैध कमाई को कई चरणों में घुमाकर चल और अचल संपत्तियों, शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसके लिए परिवार के सदस्यों और जुड़ी हुई फर्मों के नाम का भी इस्तेमाल किया गया। इसके इनुपट मिलने पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत अटैचमेंट की कार्रवाई की गई है।
अब तक 36.14 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त
ईडी के अनुसार, इस घोटाले में शामिल आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सिंडीकेट बनाकर किसानों से जमीन लेकर उसके एवज में मिले मुआवजे में धोखाधड़ी की। दस्तावेजों में हेराफेरी कर जमीन को टुकड़ों में बांटकर कई बार मुआवजा लिया। वहीं, मुआवजा लेने के बाद कमीशनखोेरी कर किसानों को रकम का भुगतान किया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत प्रोविज़नल अटैचमेंट किया गया है। बता दें कि इस घोेटाले में अब तक 36.14 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को ज़ब्त किया गया है।
पूरक चालान पेश
रायपुर-विशाखापत्तनम तक प्रस्तावित भारतमाला परियोजना घोटाले में मनीलॉन्ड्रिंग मामले में जय प्रकाश गांधी और 13 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ रायपुर के विशेष अदालत में पूरक चालान पेश किया गया है। इसमें बताया गया है कि छत्तीसगढ के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग/एंटी-करप्शन ब्यूरो में 23 अप्रैल 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी। इसमें अभनपुर के तत्कालीन एसडीओ (रेवेन्यू) निर्भय साहू और अन्य लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज तक चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसकी जांच करने पर पता चला कि जमीन मालिकों और निजी व्यक्तियों ने जमीन के दलालों और रेवेन्यू अधिकारियों के साथ आपराधिक मिलीभगत कर खेल किया।
ज़मीन खरीदी और धोखाधड़ी से टुकड़े किए
30 जनवरी 2020 को नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ज़मीन खरीदी और धोखाधड़ी से उसके टुकड़े किए। निर्धारित दर से ज्यादा दरों पर मुआवज़ा के लिए ज़मीन को कई छोटे हिस्सों में बांटा गया। इसमें परिवार के सदस्यों के नाम पर सेल डीड (बिक्री विलेख) और गिफ्ट डीड (दान विलेख) के ज़रिए किए गए हस्तांतरण भी शामिल थे।
2.13 करोड़ रुपए का मुआवजा गलत तरीके से हासिल किया
जांच में पता चला कि ग्राम नायकबंधा के अलग-अलग खसरा नंबरों वाली ज़मीन के टुकड़ों के लिए अन्य ज़मीन मालिकों/लाभार्थियों को भी इसी तरह ज़्यादा मुआवज़ा मिला। इस घोटाले में शामिल उमा तिवारी ने ज़मीन के दिवंगत मालिक की गोद ली हुई बेटी बताकर जाली रेवेन्यू रेकॉर्ड के आधार पर गांव उगेतारा में ज़मीन के लिए 2.13 करोड़ रुपए का मुआवजा गलत तरीके से हासिल किया।
छापेमारी में नकदी और ज्वेलरी मिली
ईडी ने भारतमाला घोटाले की जांच करने के लिए 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को छापेमारी की थी। इस दौरान तलाशी में 49 लाख कैश, 89.80 लाख रुपए 37 किलो 133 ग्राम चांदी ज़ब्त की गई थी। साथ ही जमीन के दलालों के सिंडिकेट की 23.35 करोड़ रुपए संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया गया था। वहीं प्रकरण की जांच करने के बाद जमीन दलाल हरमीत सिंह खनुजा व अन्य के खिलाफ 2 जून 2026 को पहली अभियोजन शिकायत पेश की गई थी।







