
जापान में होने वाले एशियाड खेलो में व्हीआईपी क्रिकेटर्स विश्व खेल में प्रतिष्ठित खेल सूची में क्रिकेट नहीं है। इसका प्रमाण भी है कि दुनियां के सबसे महत्वपूर्ण खेल कुंभ में 1896 से लेकर 2024 तक के ओलंपिक खेलों में केवल एक बार 1900 ओलंपिक खेलो में क्रिकेट को शामिल किया गया था। उस दौर में फ्रांस क्रिकेट खेलता था (आप हँस सकते हो)। 1900 के साल के ओलंपिक में तब के दौर में क्रिकेट खेलने वाले कुल जमा तीन देश इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ही थे। इन तीनों देश की ओर से कोई टीम नहीं गई थी।फ्रांस में दो क्लब आपस मे खेले और विजेता उप विजेता बन गए। कालांतर में ये दो देश के रूप में मान लिया गया था। बहरहाल 2028 के ओलंपिक में क्रिकेट भी एक खेल के रूप में शामिल हो गया है।
जापान में एशियाड खेलो का आयोजन इसी माह शुरू होने वाले है।इस आयोजन में भी क्रिकेट को एक खेल के रूप में एशियाई खेलो में दूसरी बार शामिल किया गया है।
हिंदुस्तान की महिला और पुरुष क्रिकेट टीम एशिया में तो निर्विवाद रूप से गोल्ड मेडल की सबसे तगड़ी दावेदार है साथ ही पूर्व की विजेता भी है। बीसीसीआई इनका प्रबंधन देखता है।इन्होंने जापान में खिलाड़ियों के रुकने वाली व्यवस्था को देख कर असंतोष जताया कि हमारे स्टार खिलाड़ी खेलगांव एक छोटे से अस्थाई कमरे में दो लोगों के शेयरिंग वाले कमरे में रुकेंगे, जहां से कामन टायलेट थोड़ा दूर है। बीसीसीआई ने बहुत मिन्नत की लेकिन जापान एशियाड के आयोजकों क्रिकेट खिलाड़ी वह भी केवल पुरुषों के रुकने ने बात नहीं मानी। उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे तो न आए। आखिरकार हार माननी पड़ी और अब जब हिन्दुस्तान की पुरुष क्रिकेट टीम जाएगी तो दी गई व्यवस्था में रुकेगी
ओलंपिक सहित विश्व स्तरीय खेल जिसमें एशियाड भी आता है इसमें किसी खेल या खिलाड़ी को प्रमुखता नहीं जाती है।सभी के साथ बराबरी का व्यवहार खान पान, आवास , परिवहन आदि में दिया जाता हैं।
दुनियां में फुटबॉल,टेनिस और बास्केटबॉल के खिलाड़ियों के आय के सामने हिंदुस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों की फीस और विज्ञापनों से आय एक कोने में नहीं लगती है। ये तीनों खेल ओलंपिक के नियमित खेल है और इन खेलो को खेलने वाले देशों की संख्या सौ से अधिक है।क्रिकेट के समान केवल बारह देशों तक सीमित भी नहीं है। इन खेलो के खिलाड़ी ओलंपिक एशियाड में आते हैं तो दीगर खेल के खिलाड़ियों के समान खेल गाँव में ही रहते है। 1988 में टेनिस की स्टार खिलाड़ी स्टेफी ग्राफ जो उस साल चारों ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट जीत चुकी थी वे जर्मनी के अन्य खेलो के खिलाड़ियों के समान ओलंपिक खेल के लिए बने खेल गांव में रही।
दरअसल, बीसीसीआई एक अमीर खेल संस्थान है।विज्ञापनों और प्रसारण अधिकार के चलते पैसा मुसलाधार बरस रहा है।इसके चलते अपने खिलाड़ियों को व्हीआईपी बना लिए है जो पांच सितारा होटल से नीचे बात नहीं करते। विश्व स्तरीय खेल जो एक महाद्वीप का हो या सभी महाद्वीपों का इसमें खेल और खेल भावना प्रमुख रहती है।जीतो तो गर्व नहीं हारो तो शर्म नहीं, ये मूलमंत्र सिखाया जाता है और बीसीसीआई अपने ही देश के खिलाड़ियों के साथ रुकने खाने और अन्य सुविधा के नाम पर भेदभाव करने पर तुली थी। जापान के एशियाड को आयोजन समिति ने आईना दिखाकर बता दिया है खिलाड़ियों के साथ भेद भाव नहीं होगा।बीसीसीआई ने तो हिंदुस्तान की बी टीम को भी भेजने की भभकी दी थी, कोई सुनवाई नहीं हुई, हार कर सुनील गावस्कर से एक विज्ञापन करवा कर प्रमुख टीम को भेजने का संदेश चल रहा है। याद आता है एक बार हिंदुस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने पांच सितारा होटलों में रुकने को लेकर फाइव स्टार जेल में रहने की टिप्पणी की थी बीसीसीआई को इसे याद करना चाहिए।
संजय दुबे







