नईदिल्ली, केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में जुटी है. सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी चल रही है. इसमें छत्तीसगढ़ में लोकसभा की सीटें बढ़कर 17 हो सकती हैं. यह प्रस्ताव जनसंख्या के मौजूदा अनुपात को बनाए रखते हुए परिसीमन आयोग के जरिए लागू किया जाएगा, जिसमें कुल सीटों का एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा. सरकार इससे जुड़ा हुआ एक बिल नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक मौजूदा सत्र में ही संसद में पेश कर सकती है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार इस संशोधन विधेयक को लेकर तमाम राजनीतिक दलों के साथ एक आम सहमति बनाने की कोशिश में भी लगी हुई है. जानकारी के मुताबिक नए विधेयक में मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. परिसीमन का लाभ सिर्फ बड़े राज्यों तक सीमित नहीं है. छत्तीसगढ की सीटें 11 से बढ़कर 17 करने का प्रस्ताव है. इस तरह से यहां 6 सीटों का इजाफा हो सकता है।
आरक्षित वर्ग की सीटों में भी होगा बड़ा बदलाव
लोकसभा में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के प्रतिनिधित्व को भी जनसंख्या के नए आंकड़ों के अनुसार संतुलित किया जाएगा. प्रस्तावित बिल के अनुसार, SC के लिए आरक्षित सीटों की संख्या मौजूदा 84 से बढ़ाकर 126 की जा सकती है. इसी तरह, ST वर्ग के लिए आरक्षित सीटें 47 से बढ़कर 70 होने की उम्मीद है. यह कदम सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक बदलाव साबित होगा.
सरकार नारी वंदन अधिनियम विधेयक पर क्या लेगी फैसला?
हालांकि वैसे तो सरकार नारी वंदन अधिनियम विधेयक संसद के दोनों सदनों में लाकर उसको पारित कर के कानून की शक्ल दे चुकी है, लेकिन उस कानून में 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी. फिलहाल अब सरकार की कोशिश यह है कि कहीं ऐसा ना हो कि 2027 की जनगणना की पूरी प्रक्रिया में वक्त लग जाए और 2029 में महिला आरक्षण लागू न हो पाए. इसी वजह से सूत्रों के मुताबिक सरकार इस नए संशोधन बिल को लाकर ये सुनिश्चित करना चाहती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करवा कर महिला आरक्षण को 2029 चुनाव से पहले लागू कर दिया जाए. गृह मंत्री अमित शाह और सरकार के अन्य वरिष्ठ स्तरों पर विपक्ष और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ आम सहमति बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, ताकि परिसीमन और आरक्षण की इस प्रक्रिया को बिना किसी बड़े विवाद के 2029 के चुनावों तक जमीन पर उतारा जा सके.






