सोनम वांगचुक जिंदाबाद,सीजेपी जिंदाबाद, इंडिया ब्लॉक गठबंधन जिंदाबाद, सरकार जिंदाबाद तमाम बुद्धजीवी, गैर बुद्धजीवी, और सभी छात्र(असामाजिक तत्वों को छोड़कर) जिंदाबाद। सभी के संयुक्त प्रयास से शिक्षा विभाग में हुई गड़बड़ियों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा।
नैतिकता की बात बेमानी है लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कुछ बाते अच्छी लिखी कि वे देश के युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और न्यायसंगत अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य किसी कानूनी पेचीदगी में उलझे या राष्ट्रविरोधी ताकतें इस स्थिति का फायदा उठाएं।
सीजेपी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के जिन उद्देश्यों को लेकर जंतर मंतर में बैठा था उसमें पहली बड़ी सफलता हासिल कर चुका है।बाकी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक प्रक्रिया गतिशील है। भविष्य में एडुकेशन माफिया के चलते ईमानदार मेहनतकश छात्रों को ये अंदेशा न हो कि होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं महज दिखावा है छलावा है,इसके लिए न केवल केंद्र की सरकार बल्कि हर राज्यो के सरकारों का विधिक और नैतिक दायित्व है कि अपने अपने राज्यों होने वाली न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं को विश्वसनीय बनाए बल्कि ये विश्वास दिलाने में पारदर्शिता रखे कि ईमानदारी दो सौ फीसदी है।
सीजेपी सहित विपक्षी दलों और बुद्धजीवियों ने केंद्र द्वारा आयोजित किए जाने नीट परीक्षा में असफलता के लिए शिक्षा मंत्री को जवाबदेह माना और इस्तीफे से नीचे की शर्त पर ही बात मानी।अच्छी बात है।सुधार कही से हो लेकिन एक जगह रुक न जाए क्योंकि सुधार की गुंजाइश केवल शिक्षा विभाग में ही नहीं बल्कि जन कल्याण के हर विभाग में है। नीट परीक्षा के माध्यम से शिक्षा विभाग डॉक्टर बना कर हर साल 1. 37लाख ग्रेजुएट डॉक्टर्स और 86 हजार पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर्स और की ख़ेफ देता है। इसके बावजूद देश के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ दीजिए शहरी क्षेत्रों के शासकीय हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स के पद खाली पड़े है। मेडिकल कॉलेज हर साल खुल रहे है लेकिन पढ़ाने वालों का अकाल पड़ा हुआ है।
विपक्ष सहित सीजेपी के लिए ये चुनौती है कि उनको चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए सकारात्मक प्रयास का दबाव बनाने की जरूरत है। राज्य सरकारों के पास तैयारशुदा जवाब है डॉक्टर्स से जबरिया नौकरी नहीं कराई जा सकती है। इसका अर्थ ये है कि सरकारी हॉस्पिटल्स में देश के नागरिकों को मुफ्त चिकित्सा नहीं मिलेगी। इसका भी जवाब है निजी हॉस्पिटल्स को सरकार की चिकित्सा योजना से संबद्ध कर दिया है।चिकित्सा कार्ड का उपयोग कर लाभ लिया जा सकता है।सच तो ये है कि निजी हॉस्पिटल्स की अपनी बाध्यता है , उन्हें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर सहित स्टाफ का खर्च निजी तौर पर उठाना है।इस कारण जो भी मरीज सरकार का कार्ड लेकर जाएगा उसका निजी खर्च होगा ही( इसे वर्तमान भाषा में लूट का नाम दिया जाता है)।
क्या केंद्र के शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेने वाले सीजेपी और विपक्ष के सामने शिक्षा मंत्रालय के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय में सुधार का मसौदा होगा।
स्तंभकार- संजय दुबे






