DONATE;वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल अपनी 75% संपत्ति दान करेंगे, बेटे के निधन के बाद लिया फैसला

नईदिल्ली, वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के लिए यह समय निजी तौर पर बेहद दर्दनाक है. अमेरिका में उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल के असमय निधन के बाद उन्होंने एक बार फिर अपने उस संकल्प को दोहराया है, जिसके तहत वह अपनी 75 प्रतिशत से अधिक संपत्ति समाज के कल्याण के लिए दान करेंगे.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक भावुक संदेश में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश को भारत और उसकी संभावनाओं पर अटूट विश्वास था. वह अक्सर कहा करता था कि देश में किसी भी चीज़ की कमी नहीं है और भारत को कभी पीछे नहीं रहना चाहिए. इसी सोच से प्रेरित होकर दोनों ने मिलकर एक सपना देखा था ऐसा भारत, जहां कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, महिलाएं आत्मनिर्भर हों और हर युवा को सम्मानजनक रोजगार मिले.

अग्रवाल ने लिखा, “मैंने अपने बेटे से वादा किया था कि हम जो भी कमाएंगे, उसका बड़ा हिस्सा समाज को लौटाएंगे. आज, उसके जाने के बाद, मैं उस वादे को और दृढ़ता से दोहराता हूं और पहले से भी अधिक सादा जीवन जीने का संकल्प लेता हूं.”उन्होंने कहा कि अग्निवेश भले ही अब उनके साथ नहीं है, लेकिन उसके विचार और उसका असर उन लोगों की ज़िंदगी में हमेशा जीवित रहेगा, जिन्हें उसने किसी न किसी रूप में छुआ.
अनिल अग्रवाल ने इस दिन को अपने जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया. उन्होंने जानकारी दी कि अग्निवेश एक स्कीइंग दुर्घटना में घायल हुआ था और इलाज के दौरान उसकी हालत में सुधार भी हो रहा था. न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था और डॉक्टरों को लग रहा था कि खतरा टल चुका है.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अचानक आई स्वास्थ्य जटिलताओं और दिल का दौरा पड़ने से अग्निवेश का निधन हो गया. अपने दर्द को शब्दों में पिरोते हुए अग्रवाल ने लिखा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने का दुख बयान करना असंभव है. “बेटे को पिता से पहले नहीं जाना चाहिए,” उन्होंने कहा. “यह नुकसान हमें भीतर तक तोड़ गया है और हम अब भी इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं.”
इस अपार व्यक्तिगत क्षति के बीच अनिल अग्रवाल ने एक बार फिर साफ किया है कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और मजबूत हुई है. अपनी संपत्ति का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दान करने का उनका संकल्प अब केवल एक वादा नहीं, बल्कि बेटे की याद में लिया गया जीवन-भर का निर्णय है.




