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SC; सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में 75,000 केस निपटाया, जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में 75,000 से भी ज्यादा केस का निपटारा किया है। यह इतनी बड़ी संख्या है, जिसके लिए दुनिया की सर्वोच्च अदालतों को सोचना भी मुमकिन नहीं है। यह बात सही है कि भारत की जनसंख्या के मुकाबले यह संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन अगर हम आबादी और जजों की संख्या के अनुपात को दुनिया में न्यायपालिका की हालातों से तुलना करेंगे तो यह बहुत ही बड़ा आंकड़ा है। क्योंकि, भारत में जनसंख्या के मुकाबले जजों की संख्या विश्व में सबसे कम है।

मीडिएशन को बताया जा रहा समाधान

नईदिल्ली, हाल ही में ‘एक्सप्लोरिंग द एफिशिएंसी एंड रीच ऑफ मीडिएशन’ नाम के एक नेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश में मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए और व्यवहारिक समाधान की ओर देखने की जरूरत है। इसके लिए मीडिएशन सही तरीका हो सकता है। उनके अनुसार इससे दोनों ही पार्टियों को आपसी सहमति पर आने का मौका मिलता है, न कि परंपरागत तरीके से अदालती लड़ाई लड़ते रहने की। देश के अनेकों कानूनविद् तुषार मेहता की तरह का ही विचार रखते हैं, ताकि हमारी न्यायपालिका पर बोझ कम हो सके।

भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुकाबले सब पीछे

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 75,000 से ज्यादा मामले निपटाए हैं। वहीं तथ्य यह है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हर साल जो हजारों केस दर्ज होते हैं, उनमें से बहस के लिए उसके पास मुश्किल से 70 से 80 मामले ही पहुंच पाते हैं। ब्रिटेन का उदाहरण ले लें। पिछले साल 29 दिसंबर तक यूके सुप्रीम कोर्ट के सामने 200 से कुछ ज्यादा केस आए और इसने लगभग 50 केस में ही फैसला सुनाया। इसके ठीक उलट भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1,400 बड़े फैसले सुनाए और हजारों आदेश देकर मामलों का निपटारा किया।

अमेरिका, ब्रिटेन सोच भी नहीं सकते

अगर भारतीय न्यायपालिका की बात करें तो यहां आबादी के अनुमात में जजों की संख्या दुनिया में सबसे कम यानी प्रत्येक 10 लाख की जनसंख्या पर सिर्फ 21 है। वहीं अमेरिका में इतनी ही आबादी पर 150 जज काम कर रहे हैं। विधि आयोग की 1987 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी प्रत्येक 10 लाख की जनसंख्या पर 50 जजों की सिफारिश की गई थी, और यह भी अमेरिका के मुकाबले मात्र एक-तिहाई ही है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट में भी है और फिर भी जितने केस का समाधान एक साल में हुआ है, वह अमेरिका और ब्रिटिश न्यायपालिका के लिए सोच पाना भी नाममुकिन है।

जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट में अभी जजों की स्वीकृत संख्या 34 है। अगर देश की जनसंख्या करीब 150 करोड़ मानकर अंदाजा लगाएं तो लगभग 4.5 करोड़ की आबादी पर सुप्रीम कोर्ट में मात्र एक जज हैं। 34 संख्या भी 2019 में बढ़ाई गई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में जितने मामले पहुंच रहे हैं, उस हिसाब से जजों की संख्या न के बराबर है और फिर भी दुनिया भर की न्यायपालिका के लिए यह एक नजीर पेश करने में सफल हुआ है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड भी कह चुके हैं, ‘हमें सीधे-सीधे और ज्यादा जजों की आवश्यकता है, हम सरकार के साथ संपर्क में हैं, ताकि सभी स्तर पर न्यायपालिका की संख्या में बढ़ोतरी हो।’

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