नई दिल्ली, ईरान ने साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए भीषण हमले का बदला ले लिया है। उसने कतर के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए, जिसमें भीषण आग लग गई। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमलों और जवाबी ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में अब तेल और गैस को निशाना बनाया जा रहा है। नतीजा ये हुआ है कि कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट के बढ़ते हमलों का सबसे ज्यादा असर एशियाई मार्केट पर हो रहा है। ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से पहले से ही खाड़ी से भारत को तेल और गैस की सप्लाई में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
साउथ पार्स फील्ड पर हमले से ईरान ने का नया गेम प्लान
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गॉर्ड्स (IRGC) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल उसके तेल-गैस के ठिकाने तबाह कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि इजरायल ने बिना अमेरिका को बताए ईरान के साउथ पार्स फील्ड पर हमले किए हैं। इसे लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विवाद बढ़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के पार्स गैस फील्ड सफाई देते हुए कहा है कि उसे इस हमले की जानकारी नहीं है।ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया है कि मध्य पूर्व में जो कुछ हुआ है, उससे नाराज होकर इजरायल ने ईरान में साउथ पार्स गैस फील्ड नाम की एक मुख्य फैसिलिटी पर हमला किया है।…ईरान ने अन्यायपूर्ण तरीके से कतर की एलएनजी गैस सुविधा के एक हिस्से पर हमला किया।
ईरान ने भी ले लिया बदला, कतर पर ताबड़तोड़ हमले
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से कतर की रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर ये हमले किए हैं, जो कतर का मुख्य एनर्जी हब है। कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी ने कहा है कि इन हमलों में हब को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
भारत को गैस सप्लाई के लिए कतर कितना अहम
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत की कुल गैस उपलब्धता का करीब 50 फीसदी LNG सप्लाई से पूरी होती है। भारत ने 2025 में 24-25 मिलियन टन LNG आयात किया, जो देश को दुनिया के सबसे बड़े LNG खरीदारों में से एक बनाता है। भारत करीब 50 फीसदी LNG का आयात कतर से ही करता है।
किन-किन देशों से गैस मंगाता है भारत
रिपोर्ट के अनुसार, कतर के अलावा भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से मंगाता है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात से LNG से लदे जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे। भारत का करीब 50 से 55 फीसदी LNG आयात इसी रास्ते से गुजरता है। फिलहाल, यह रास्ता ईरान ने बंद कर दिया है।
कैसे बदल रहा अमेरिका-ईरान युद्ध का रुख
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध का नेचर अब बदलता जा रहा है। सैन्य लड़ाई अब एनर्जी फैसिलिटीज के साथ ज्यादा आर्थिक होता जा रहा है। ईरान की अर्थव्यवस्था एनर्जी एक्सपोर्ट्स और घरेलू आपूर्ति पर निर्भर है। साऊथ पार्स फील्ड अकेले ही बड़ी मात्रा में नेचुरल गैस सप्लाई करती है। इजरायल ने इसीलिए इस फील्ड पर हमले किए, ताकि ईरान कमजोर पड़ जाए। साउथ पार्स सीधे तौर पर कतर की नॉर्थ डोम फील्ड से भी जुड़ी है। इस पर हमले से कतर के एलएनजी एक्सपोर्ट और ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स पर पड़ता है।
भारत आने वाले हैं 13 एलएनजी कार्गो
शिपिंग डाटा देने वाली केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, बीते 10-26 फरवरी को 13 LNG कार्गो लोड किए गए थे, जो भारत जाने के रास्ते में हैं। इनकी डिलीवरी पूरे मार्च तक होनी है। मगर,कतर की लास लफ्फान LNG कॉम्लेक्स (7.7 करोड़ टन सालाना प्रोडॅक्शन) ने 2 मार्च से अपनी सप्लाई रोक रखी है।







