तेहरान, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच तनाव अब और बढ़ गया है. ईरान के हमलों के बाद कतर ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को ‘परसोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है. कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला उसकी संप्रभुता पर बार-बार हुए हमलों और आक्रामक कार्रवाई के जवाब में लिया गया है. दोहा स्थित ईरानी दूतावास को आधिकारिक नोट देकर सैन्य अताशे, सुरक्षा अताशे और उनके स्टाफ को तुरंत देश छोड़ने को कहा गया है.
कतर की गैस फील्ड पर हुआ हमला
यह बड़ा कदम ऐसे समय आया है जब कतर के सबसे अहम ऊर्जा केंद्र रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला हुआ. यह वही जगह है जो कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है और दुनिया की LNG सप्लाई में बड़ी भूमिका निभाती है. कतर एनर्जी के मुताबिक हमले में भारी नुकसान हुआ, हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई हताहत नहीं हुआ. फायर टीमों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया.
सऊदी-कतर-UAE को चेतावनी
वहीं दूसरी तरफ ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को सीधी चेतावनी दी है कि वे अपने प्रमुख पेट्रोकेमिकल और गैस ठिकानों को तुरंत खाली कर दें, क्योंकि आने वाले घंटों में इन पर हमले हो सकते हैं. ईरान के सरकारी मीडिया के जरिए जारी इस चेतावनी में कहा गया कि ये ऊर्जा केंद्र अब ‘वैध और सीधे टार्गेट’ बन चुके हैं’ ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि इन ठिकानों पर जल्द ही हमला किया जाएगा, इसलिए वहां मौजूद नागरिकों, कर्मचारियों और स्टाफ को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है.
किन जगहों पर हो सकता है हमला?
निशाने पर जिन प्रमुख ठिकानों का जिक्र किया गया है, उनमें सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैस फील्ड, और कतर के मेसाईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स तथा रास लफान रिफाइनरी शामिल हैं। ये सभी दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में गिने जाते है
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब कुछ ही समय पहले इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया गया था. यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है और ईरान की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ है. इजरायली अधिकारी ने भी इस हमले को अमेरिका की मंजूरी और समन्वय से किया गया बताया है.
UAE के गैस प्लांट पर गिरा मलबा
सऊदी अरब ने राजधानी रियाद के ऊपर कई बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया, जबकि कुछ ड्रोन भी इंटरसेप्ट किए गए. मलबा गिरने से कुछ लोग घायल हुए. उधर अबू धाबी में भी तेल और गैस सुविधाओं के पास मिसाइल के मलबे गिरने से संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ, हालांकि वहां भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.
ईरान ने पहले ही संकेत दे दिया था कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे तो वह खाड़ी देशों के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा. अब कतर पर हमले और उसके बाद उठाए गए कूटनीतिक कदमों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है. इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा रही है.
ईरानी विदेश मंत्री ने घुमाया पाकिस्तान को फोन
अब्बास अरागची ने तेहरान में कई बड़े देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की. ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग बातचीत में तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों से संपर्क किया. इन बातचीत में उन्होंने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई और कहा कि इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया पर पड़ सकता है. उन्होंने क्षेत्रीय देशों से सतर्क रहने और मिलकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि इस बढ़ते तनाव का सामना किया जा सके.
ब्रिटेन के जहाज पर निशाना, कतर के पास हुई घटना
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी UKMTO ने बताया है कि कतर के रस लफान से करीब 7 किलोमीटर दूर एक घटना हुई है. एजेंसी के अनुसार, एक जहाज को किसी अज्ञात हथियार से निशाना बनाया गया है. राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी लोग सुरक्षित हैं. एजेंसी ने सभी जहाजों को सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी देने की सलाह दी है. साथ ही, मामले की जांच जारी है.
ईरान ने कतर में यूएस एयरबेस पर किया हमला
युद्ध के 20वें दिन भी ईरान के हमले रुक नहीं रहे हैं. ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पर धमाके किए हैं. ईरानी मीडिया आउटलेट Press TV ने दावा किया कि इस बेस के पास विस्फोट हुए. हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है.
ईरान ने कतर की गैस फैसिलिटी पर फिर किया हमला, लगी आग
ईरान के सरकारी टीवी ने दावा किया है कि रस लफान इडस्ट्रियल सिटी पर एक बार फिर मिसाइल हमला हुआ है और वहां आग लग गई है. हालांकि अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर ने भी इस क्षेत्र पर दोबारा हमले की पुष्टि की है, जिसमें कुछ नुकसान हुआ लेकिन किसी की जान नहीं गई है. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है और खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकाने लगातार निशाने पर हैं. कुल मिलाकर, स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर इसका असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है.
ईरान के हमलों से घबराया अमेरिका, ट्रंप ने दी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी कि अगर उसने कतर के एलएनजी ठिकानों पर दोबारा हमला किया तो अमेरिका जोरदार जवाब देगा. उन्होंने कहा कि कतर के रस लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हालिया मिसाइल हमले के बाद ऐसी स्थिति बनी है. ट्रंप ने चेताया कि यदि ईरान ने फिर हमला किया, तो अमेरिका साउथ पार्स गैस फील्ड को भारी ताकत से नष्ट कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हालिया हमले में अमेरिका शामिल नहीं था और कतर को इसकी जानकारी नहीं थी.
तेल कीमतें 110 डॉलर पार, एशियाई बाजारों में गिरावट
मिडिल ईस्ट में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बाद तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, जिससे एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई. जापान का निक्केई 225 करीब 2.7 फीसदी गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.6 फीसदी नीचे आया. हांगकांग का हैंग सेंग 1.4 फीसदी और ताइवान का ताइएक्स भी 1.4 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा. बढ़ती तेल कीमतों और युद्ध के असर से वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है.
ईरान युद्ध के लिए पेंटागन ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा की मांग की
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन ने ईरान युद्ध के लिए व्हाइट हाउस से 200 अरब डॉलर से ज्यादा के फंड की मांग की है. बताया जा रहा है कि यह अब तक के खर्च से कहीं ज्यादा है और इसका मकसद तेजी से हथियारों के उत्पादन को बढ़ाना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो हफ्तों में कई फंडिंग प्रस्ताव सामने आए हैं और इस पर अमेरिकी संसद में बड़ा राजनीतिक टकराव हो सकता है. हालांकि रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
यूएई के पास जहाज पर हमला, ओमान की खाड़ी में लगी आग
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक यूएई के खोर फक्कन के पास ओमान की खाड़ी में एक जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया. हमले के बाद जहाज में आग लग गई. यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब हुई है. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक इस पूरे इलाके में 20 से ज्यादा तेल टैंकर और मालवाहक जहाजों पर हमलों या संदिग्ध घटनाओं की रिपोर्ट सामने आ चुकी है.







