रायपुर, छत्तीसगढ में दिनोदिन बढ़ते गर्मी के साथ ग्रामों में व्याप्त निस्तारी पानी की समस्या व भूगर्भीय जल स्त्रोत के नीचे जाने से पेयजल संकट गहराने की ओर शासन – प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराये जाने के बाद हरकत में आये प्रशासन ने बीते बुधवार को समस्या से निजात दिलाने गंगरेल का पट खोल दिया गया है । शुरुआती 5 सौ क्यूसेक के डिस्चार्ज को दो भागों में बांट महानदी मुख्य नहर व मांढर शाखा नहर में प्रवाहित किया जा रहा है जिसके चलते पानी की दौड़ काफी धीमी है । सूत्रों के अनुसार डिस्चार्ज को क्रमशः धीरे – धीरे बढ़ाया जावेगा और इसकी शुरुआत कर दी गयी है ।

ज्ञातव्य हो कि गर्मी के चलते तालाबों के सूखते जाने की वजह से ग्रामों में जहां निस्तारी संकट उठ खड़ा होना शुरू हो गया है वहीं भूगर्भीय जल स्त्रोत के नीचे जाते जाने की वजह से पेयजल समस्या भी सामने आना शुरू हो चुका है जिसे की तालाबों के भरने से एक सीमा तक रोका जा सकता है । ग्रामीणों की मांग व ज्वलंत समस्या को देखते हुते बीते मंगलवार को जहां बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अधीन आने वाले 10 सिंचाई पंचायतों के पूर्व अध्यक्षों ने जहां विभागीय अधिकारियों से अविलंब गंगरेल से निस्तारी पानी छोड़ने की गुहार लगाई थी वहीं रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व मुख्य सचिव विकासशील सहित क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल को मेल से ज्ञापन भेज गंगरेल से निस्तारी पानी छुड़वाने का आग्रह किया था ।
इसके पहले अभनपुर क्षेत्र से विधायक रहे पूर्व सिंचाई मंत्री धनेन्द्र साहू ने भी निस्तारी पानी की समस्या को लेकर शासन – प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया था । सिंचाई पंचायतों के अध्यक्ष रहे हिरेश चंद्राकर , तुलाराम चन्द्राकार , गोविंद चंद्राकर , चिंताराम वर्मा, प्रहलाद चंद्राकर, मनमोहन गुप्ता, भारतेन्दु साहू, धनीराम साहू,थानसिह साहू ने डिस्चार्ज बढ़ाने की मांग के साथ – साथ पानी के व्यर्थ बरबादी को रोकने पर्याप्त मैदानी अमला की व्यवस्था करने व संबंधित यंत्रियों तथा सिंचाई अनुविभागीय अधिकारियों को सतत् दौरा सुनिश्चित कराने का आग्रह विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से किया है ।







