FARMING; प्रदेश में 6000 करोड़ के कर्ज से 37 लाख हेक्टेयर में खेती पर खाद संकट का खतरा मंडराने लगा

रायपुर, छत्तीसगढ में इस खरीफ सीजन में किसानों ने सहकारी बैंकों से अब तक करीब 6000 करोड़ रुपए का कृषि ऋण लेकर धान व अन्य फसलों की बुआई-रोपाई की है। अभी भी धान की रोपाई तेजी से चल रही है लेकिन अब समय पर यूरिया और डीएपी खाद नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ रही है. बरसात के इस अहम दौर में खाद की कमी से फसल उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना से किसान बेहद चिंतित हैं. कुछ किसानों को सामान्य से आधा या चौथाई ही खाद मिला है। ऐसे में उनकी लागत और मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडराने लगा है.

अब तक 37 लाख हेक्टेयर खेती

छत्तीसगढ़ में इस बार खरीफ सीजन में खेती-किसानी तेजी से आगे बढ़ रही है। पूरे प्रदेश में अब तक 37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी खरीफ फसलों की बोनी पूरी हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 80 प्रतिशत से ज्यादा है। राज्य सरकार ने इस खरीफ सीजन में कुल 48.85 लाख हेक्टेयर में फसल बोने का लक्ष्य रखा है। खाद की जमकर कालाबाजारी

प्रदेश की अधिकांश सहकारी समितियों में खरीफ सीजन की शुरुआत से डिमांड के अनुसार यूरिया-डीएपी खाद का भंडारण नहीं हो पाया है. सोसाइटियों में पर्याप्त खाद नहीं होने का फायदा निजी दुकान संचालक उठा रहे. किसानों को 266.50 रुपए के यूरिया खाद को 600 रुपये से एक हजार रुपए में बेच रहे, है तो 1350 रुपए प्रति बैग मिलने वाली डीएपी को दो हजार रुपए तक बेच रहे हैं. वहीं पडोसी राज्य उडीसा में 450 रुपये में यूरिया और 1500 रुपये में डीएपी खाद मिल रही है। मतलब यहाँ खाद की जमकर कालाबाजारी हो रही है। व्यापारियों के पास खाद का स्टाक लबालब है। इसके बाद भी कोई भी कलेक्टर निजी विक्रेताओं के गोदाम की जांच करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। मसलन किसान हलाकान है।

खाद वितरण में भी तेज रफ्तार का दावा

कृषि अफसरों का दावा है कि खाद वितरण में भी इस बार अच्छी प्रगति देखी गई है। इस खरीफ सीजन के लिए कुल 14.62 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक सहकारी और निजी क्षेत्रों में 13.78 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है और 10.20 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 70 प्रतिशत है।

रूक सकता है पौधों का विकास

किसानों का कहना है कि बोआई के बाद फसल को बढ़वार के लिए पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है, लेकिन समय पर खाद नहीं मिलने से पौधों का विकास रुक सकता है और उत्पादन घट सकता है. वहीं, कृषि विभाग का कहना है कि खाद आपूर्ति के लिए लगातार उच्च अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति सामान्य करने का प्रयास हो रहा है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले एक सप्ताह के भीतर खाद की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है. किसान उमीद लगाए बैठे हैं कि सरकार तुरंत इस समस्या का समाधान करें.

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