नईदिल्ली, मौजूदा संकट के बीच, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भारतीय एविएशन सेक्टर के भविष्य को लेकर एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर भी पेश की है. सूत्रों ने बताया कि मौजूदा परेशानियां ‘ग्रोइंग पेन्स’ का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन आने वाला समय यात्रियों के लिए बेहद सुगम होने वाला है.
भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी कर रही हैं. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय विमानन कंपनियां कुल 500 नए विमान खरीद रही हैं, जो जल्द ही भारतीय आसमान में उड़ान भरेंगे.
इंडिगो (IndiGo): 100 नए विमान
अकासा एयर (Akasa Air): 100 नए विमान
स्पाइसजेट (SpiceJet): 50 नए विमान
अन्य एयरलाइंस: शेष 250 विमान
3-4 साल में बदल जाएगी तस्वीर
सरकार का मानना है कि अगले 3 से 4 वर्षों में और भी नई एयरलाइंस एक्शन में होंगी और मौजूदा एयरलाइंस की क्षमता भी बढ़ जाएगी. नए विमानों के आने से न केवल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि टिकट की कीमतों में भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी. सूत्रों का कहना है, “अभी हम जिस दबाव को देख रहे हैं, वह मांग और आपूर्ति के अंतर के कारण भी है. लेकिन जैसे-जैसे ये 500 विमान सिस्टम में जुड़ेंगे, ‘इंडियन स्काईज’ में यात्रा करना बहुत आसान और आरामदायक हो जाएगा. अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों द्वारा बेड़े का विस्तार यह सुनिश्चित करेगा कि बाजार में किसी एक कंपनी का एकाधिकार (Monopoly) न रहे, जिससे यात्रियों के पास हमेशा विकल्प मौजूद रहेंगे.
देश को 5 बड़ी विमानन कंपनियों की है जरूरत- उड्डयन मंत्री
केंद्र सरकार ने कहा कि यात्रियों की संख्या देखते हुए 5 बड़ी विमानन कंपनियों की जरूरत है। सोमवार को राज्यसभा में उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत आज जो क्षमता और मांग पैदा कर रहा है, उसे देखते हुए हमें पांच बड़ी एयरलाइनों की आवश्यकता है। मंत्रालय का प्रयास है कि अधिक एयरलाइनों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। विमानन क्षेत्र में इंडिगो के प्रभुत्व संबंधी सवाल पर नायडू ने कहा कि सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करेगी और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए पहले से ही लगातार काम कर रही है। भारत में एयरलाइन शुरू करने का यही सही समय है। महाराष्ट्र से सांसद मिलिंद मुरली देवड़ा ने सुझाव दिया था कि मंत्रालय को अन्य हितधारकों के साथ मिलकर गहन समीक्षा करनी चाहिए ताकि अधिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके तथा प्रवेश स्तर पर बाधाओं का पता लगाया जा सके।






