दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों का इस बारे में समान मत है कि क्रिकेट खिलाड़ी के सफल होने का असली मापदंड टेस्ट क्रिकेट है। वनडे,टी ट्वेंटी नहीं क्योंकि टेस्ट में तकनीक, धैर्य की जरूरत होती है।
2026 में आयोजित टी ट्वेंटी टूर्नामेंट के विजेता सूर्य कुमार यादव ने इच्छा जाहिर किया है कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे देश की तरफ से टेस्ट क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहेंगे। सूर्य कुमार यादव हिंदुस्तान के टेस्ट खेलने वाले 318 खिलाड़ियों में से एक खिलाड़ी है जिन्हें टेस्ट कैप पहनने का मौका मिला है।सूर्य कुमार यादव, उन 51 खिलाड़ियों में से भी एक खिलाड़ी है जिनको अपने क्रिकेट कैरियर में केवल “एक” मात्र टेस्ट खेलने का अवसर मिला है। ऐसे खिलाड़ी जो केवल एक टेस्ट खेल पाते है उन्हें वन कैपर्र्स कहा जाता है।
सूर्य कुमार यादव 2021 से वनडे और टी ट्वेंटी टीम में खेल रहे है लेकिन उनके हिस्से में केवल एक टेस्ट है।2022-23 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सूर्य कुमार यादव को टीम में लिया गया था। सिर्फ आठ रन बनाकर सूर्य कुमार यादव जो आउट हुए तो अब तक टेस्ट का दरवाजा बंद है। सूर्य कुमार यादव 35 साल के हो चले है ऐसे में भविष्य में वे टेस्ट खेल पाएंगे, संभव नहीं दिखता है।
हिंदुस्तान के क्रिकेट टीम ने 1932से टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया है। 96 साल में कुल 318 खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। 14 खिलाड़ी तो सौ से अधिक टेस्ट खेले लेकिन 51 खिलाड़ी एक मात्र टेस्ट खेल पाए है।
लाल सिंह (1932) से लेकर अंशुल कंबोज(2025) सहित 51 खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार है
1 लाल सिंह2 एल पी जय3रुस्तम जी जमशेद जी4लड्ढा राम जी5एम जे गोपालन6 यादवेंद्र सिंह 7ख़ेरशाद मेहर होम जी 8 बाका जिलानी9अमीर इलाही10कवर राज सिंह11के के तारपोरे 12मोंटू बनर्जी13 मधुसूदन रेगी14 शूटे बनर्जी 15हीरालाल गायकवाड़16शाह न्यालचंद17 बाय दानी18 विजय राजेन्द्रनाथ19 नारायण स्वामी 20सदाशिव पाटिल21चंद्रकांत पाटनकर22 अपूर्व सेनगुप्ता 23 अरविंद आप्टे 24 मन सूद25 राजिंदर पाल26 रमेश सक्सेना27 अजीत पई 28 केनिया जयंतीलाल29 योगराज सिंह 30 टी एस श्रीनिवासन31 गुलाम पारकर 32 राकेश शुक्ला33अजय शर्मा 34 राशिद पटेल35 एम वेंकरमन्ना 36 सलिल अंकोला37 गुरुशरण सिंह38 सुब्रतो बनर्जी39 विजय यादव40 रॉबिन सिंह41 रॉबिन सिंह जूनियर42 निखिल चोपड़ा43 सबा करीम44 राहुल सिंघवी45 इकबाल सिद्दीकी46 विनय कुमार47 करण शर्मा 48 नमन ओझा 49 टी नटराजन50 सूर्य कुमार इरॉस 51 अंशुल कंबोज।
इन खिलाड़ियों को दोबारा मौका क्यों नहीं मिला अगर इसका कारण खोजे तो पाएंगे कि इनमें से केवल एक बल्लेबाज यादवेंद्र सिंह ने अपने इकलौते टेस्ट में अर्धशतक 60 रन बनाए थे।बाकी सभी कम रनों पर आउट हो गए। मोंटू और शूटे बनर्जी ने एक टेस्ट में 5-5 विकेट लिए लेकिन दोबारा मौका नहीं पा सके।
मेरा मानना है कि केवल एक टेस्ट में खिलाड़ी का खेल नहीं देखा जा सकता है लेकिन जिनके साथ ऐसा हो गया तो हो गया।
51 खिलाड़ियों में नौ बल्लेबाजों का दुर्भाग्य रहा कि वे एक टेस्ट तो भले खेल लिए लेकिन उनके सामने शून्य रन दर्ज है। एक टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ियों के सालों को देखे तो 1936 से 1947, 1971 से 1981 और 2015 से 2021 के सालों में कोई भी खिलाड़ी ऐसा नहीं रहा जिसके हिस्से में एक टेस्ट खेलना आया हो ।1933 और 1949 का साल ऐसा रहा जिसमें 3-3 खिलाड़ी एक एक टेस्ट खेलकर बाहर हो गए। एक टेस्ट खेलने वाले योगराज सिंह उन खिलाड़ियों में शामिल है जिनके बेटे आगे चलकर देश की टीम से टेस्ट खेले। युवराज सिंह, योगराज सिंह के बेटे है। हिंदुस्तान में लाला अमरनाथ-मोहिंदर अमरनाथ, विजय मांजरेकर और संजय मांजरेकर और योगराज सिंह और युवराज सिंह पिता पुत्र की जोड़ी है।
स्तंभकार- संजयदुबे







