बिलासपुर, न्यायधानी बिलासपुर से महज 27 किमी दूर मोहभट्टा-धूमा गांव के पास शिवनाथ नदी में लाखों मछलियां मरी पड़ी हैं। भाटिया वाइन्स शराब फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को बिना ट्रीटमेंट किए बाहर फेंक दिया जा रहा है।स्प्रिट वाला यह पानी नाले के रास्ते शिवनाथ नदी में जा रहा है। इसकी वजह से नीली शिवनाथ नदी पूरी काली हो चुकी है। यही वजह है कि नदी में पलने वाले लाखों जीव-जंतु मर रहे हैं। फैक्ट्री को एक साल पहले हाईकोर्ट ने इसी वजह से कुछ दिनों के लिए बंद करवा दिया था।

गांव वालों ने बताया कि कुछ दिनों तक फैक्ट्री से पानी निकलना बंद भी हो गया था। लेकिन फिर कुछ महीनों से सप्ताह में दो-तीन दिन रात के समय पानी छोड़ा जाता है। यह पानी इतना जहरीला है कि अगर हाथ-पांव में लग जाए तो खुजली होने लगती है। कई लोगों को सांस की बीमारी हो गई है, लेकिन कोई इसलिए कुछ नहीं बोलता क्योंकि फैक्ट्री से लोगों को रोजगार मिला हुआ है। काम करने वालों को हर दिन शराब भी दी जाती है।
आबकारी नीति में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और ट्रीटमेंट अनिवार्य का साफ उल्लेख है। यानी बिना ट्रीटमेंट के नदी, नाला, जमीन या जल स्त्रोत में गंदगी को छोड़ने पर सख्त प्रतिबंध है। जब फैक्ट्री यह लिखित में देती है ट्रीटमेंट प्लांट लगाएगी तभी उसे पर्यावरण की एनओसी दी जाती है। उल्लंघन करने पर लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है।
बताया गया है कि भाटिया वाइन्स के आसपास 15 गांव गंदे पानी की दुर्गंध से प्रभावित हैं, जिनमें मोहभट्टा, धूमा, खजरी, सारगांव, बारगांव, नागपुरा, करही, चुनचुनिया, गोढ़ी और मदकू शामिल हैं। दहशतजदा ग्रामीणों ने बताया कि अफसर और नेता फैक्ट्री से जुड़े हैं, इसलिए आवाज उठाना मुश्किल है। पहले हाईकोर्ट में गांव वालों ने लिखकर समस्या से इनकार किया था। रोजगार के कारण लोग मजबूर हैं। एक महिला के अनुसार, सांस की समस्या बढ़ रही है और अब बाहर के लोग यहां शादी से भी कतराने लगे हैं।







