जगदलपुर, बस्तर अंचल में इस साल बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण तेंदूपत्ता संग्रहण की गति काफी धीमी है, जिससे लक्ष्य का 35 फीसदी हिस्सा ही पूरा हो पाया है। खराब मौसम से पत्तों की गुणवत्ता खराब होने के कारण संग्राहक हतोत्साहित हैं, जिससे पिछले साल के मुकाबले कारोबार में कमी की आशंका है।
बस्तर वृत में 269000 मनक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य है । इसके विरुद्ध अब तक करीब 84 हजार संग्राहकों से 92216 मानक बोरा संग्रहित हुआ है, जो करीब 35% है। प्राप्त आअकडों के अनुसार बीजापुर में 3730 मानक बोरा, सुकमा में 64971 मानक बोरा, दंतेवाडा में 13552 मनक बोरा एवं जगदलपुर में 9962 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्राहण हुआ है।
बताया गया है कि ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश के कारण पत्ते खराब हो गए हैं, जिससे संग्रहण कार्य बाधित हो रहा है। पत्तों की गुणवत्ता खराब होने से ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पिछले साल की तुलना में संग्रहण की मात्रा घटी है। लगातार बारिश के कारण तेंदू के पत्ते फड़ तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण निराश हैं।
बाताया गया है कि दंतेवाड़ा में तेंदुपत्ता खरीदी इस साल भी लक्ष्य से काफी पीछे रह गई है. 19,200 बोरे के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 13,500 बोरे ही खरीदे गए। लगातार दूसरे साल जिला लक्ष्य के आसपास भी नहीं पहुंच पाया. 152 में से सिर्फ 122 फड़ों में ही खरीदी हो सकी। नकुलनार क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया और आंकड़ा संभाला. वहीं कटेकल्याण सबसे पीछे रहा सिर्फ 8% खरीदी दर्ज हुई. इससे कई हितग्राही योजना से वंचित रह गए।
सरकार प्रति बोरा 5500 रुपए देती है, लेकिन कम खरीदी से नुकसान होगा । करीब सवा 3 करोड़ रुपए का संभावित लाभ लोगों तक नहीं पहुंचेगा। 11 समितियां औसतन 30% पीछे रहीं। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर दिख रहा है। तेंदुपत्ता पर निर्भर परिवारों की आय प्रभावित हुई है। बता दें ग्रामीणों के लिए यह आय का मुख्य साधन है, जिससे परिवार 10-12 हजार रुपए कमा लेते हैं।







