रायपुर, राज्य शासन ने तीन आईएएस अफासरों को एकाएक स्थानाअंतारित कर दिया है तथा एक आईएएस अफसर को जिले का कमान सौंपा है।आईएएस डॉ. संतोष देवांगन को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से हटा दिया गया है । इसी तरह महासमुंद जिले के सीईओ हेमंत रमेश नंदनवार एवं आयुक्त नगर निगम दुर्ग सुमित अग्रवाल को भी हटा दिया गया है। जारी आदेश के अनुसार संचालक तकनीकी शिक्षा विजय दयाराम को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का कलेक्टर बनाया गया है।
जारी आदेश के अनुसार डा. संतोष देवांगन को विशेष सचिव स्कूल शिक्षा , नंदनवार को संचालक तकनीकी शिक्षा एवं सुमित अग्रवाल को सीईओ सूडा बनाया गया है। बहरहाल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से स्थानांतरित कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के अचानक तबादले के बाद रायपुर से लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही तक तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के बीच एक निजी अस्पताल को सील किए जाने की कार्रवाई को लेकर कथित तौर पर मतभेद उभरे थे और दोनों के बीच गरमा-गरम बहस हुई थी। इसी वजह से महज दो माह पहले पदस्थ हुए कलेक्टर डा देवांगन का तबादला कर दिया गया।
किसी अधिकारी से कभी नहीं हुआ विवाद
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बातचीत में इन सभी अटकलों से पूरी तरह इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तबादले के पीछे कोई आपसी मनमुटाव या बहस नहीं है और ऐसा सोचना भी उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया गया तबादला है। स्वास्थ्य मंत्री ने गरमा-गरम बहस की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि आज तक उनका किसी भी अधिकारी के साथ कोई विवाद या नोकझोंक नहीं हुई है और न ही ऐसा कोई रिकॉर्ड है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे उस जिले के प्रभारी मंत्री नहीं हैं और इस तबादले से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है।
कलेक्टर का तबादला सरकार का प्रशासनिक निर्णय
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार समय-समय पर विभिन्न विभागों में अधिकारियों के कामकाज का आकलन करती है। यह तबादला पूरी तरह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निर्णय राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के स्तर पर लिए जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि निजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का मामला भी उनके संज्ञान में आया है। लीलावती और ज्योति सोनवानी की मौत के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ज्योति सोनवानी के मामले में प्लेसेंटा अंदर पाए जाने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि अस्पताल संचालक पर्याप्त सुविधाओं के बिना मरीजों का इलाज कर रहा था। स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस गंभीर लापरवाही पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बचाने का सवाल ही नहीं उठता। मामले में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है और आगे भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। संवाददाता ने स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया कि जीपीएम जिले में पिछले दो महीनों से एनेस्थीसिया डॉक्टर नहीं होने के कारण स्थानीय आदिवासी मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इस पर मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई और समाधान का आश्वासन दिया।







