*छत्तीसगढ़ पंजीयन एवं मुद्रांक अधिकारी कर्मचारी संघ का वार्षिक अधिवेशन
रायपुर, छत्तीसगढ़ पंजीयन एवं मुद्रांक अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ का वार्षिक अधिवेशन गत दिवस राजधानी रायपुर के एक निजी रिसोर्ट में हुआ, इसमें प्रदेश भर से आए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जहां सांगठनिक मजबूती, वेतन विसंगति और तकनीकी समस्याओं पर गंभीर मंथन किया गया। अधिवेशन में अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ में भी वेतन विसंगति दूर करने की मांग की गई। इसके साथ ही संगठन की कमान फिर से विरेंद्र श्रीवास को सौंपी गई।
अधिवेशन में प्रदेश भर से जुटे सदस्यों ने एक सुर में कहा कि वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के कुशल नेतृत्व में विभाग में पिछले ढाई वर्षों की अल्पावधि में जनता के हित में इतने क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं, जो पिछले 50 सालों में नहीं हुए थे। पंजीयन विभाग के मैदानी अधिकारियों व कर्मचारियों ने इन परिवर्तनों को पूरे समर्पण के साथ क्रियान्वित किया है।
परंतु, सदस्यों ने इस बात पर आक्रोश के साथ दुख भी व्यक्त किया कि रजिस्ट्री विभाग एकमात्र ऐसा शासकीय विभाग है, जहां इतने महत्वपूर्ण वैधानिक काम को रोज के रोज तुरंत पूरा किया जाता है। मंत्री की मंशानुरूप क्रेता के हक में विक्रय विलेख (सेल डीड) का तुरंत नामांतरण (म्यूटेशन) भी किया जा रहा है। इसके बावजूद, पंजीयन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की 50 सालों से लंबित जायज मांगों पर शासन-प्रशासन स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
NIC की तकनीकी समस्याओं के कारण झेलना पड़ रहा जन-आक्रोश
कर्मचारियों ने अधिवेशन में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया कि एन.आई.सी. (NIC) द्वारा सॉफ्टवेयर व सर्वर की तकनीकी समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं किया जाता। सर्वर डाउन रहने या तकनीकी कमियों के कारण पंजीयन कार्य प्रभावित होता है, जिसकी वजह से मैदानी स्तर पर पदस्थ पंजीयन अधिकारियों को अकारण ही जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। संघ ने मांग की है कि एन.आई.सी. की इन तकनीकी खामियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
विरेंद्र कुमार श्रीवास के नेतृत्व पर पुनः भरोसा, मांगों के लिए सौंपे गए अधिकार
वर्तमान अध्यक्ष विरेंद्र कुमार श्रीवास के निर्भीक नेतृत्व, ऐतिहासिक विभागीय उपलब्धियों और संगठन के हित में उनके दूरदर्शी मार्गदर्शन की महती आवश्यकता को देखते हुए, संघ के समस्त सदस्यों ने सर्वसम्मति से उन्हें पुनः निर्विरोध प्रांतीय अध्यक्ष चुना। सभी सदस्यों ने पुनः निर्वाचित अध्यक्ष से गुजारिश की है कि वे इन 50 वर्षों से लंबित मांगों और वेतन विसंगति के निराकरण के लिए मंत्री ओ.पी. चौधरी जी तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से अविलंब बातचीत कर रास्ता निकालें।
एक वेतनमान’ का संकल्प
अधिवेशन में संघ ने राज्य में **’एक राष्ट्र, एक विधान, एक वेतनमान’** को लागू करने का संकल्प लिया। पदाधिकारियों ने कहा कि उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) का पद ‘इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत सृजित होता है, जो पूरे भारत में एक समान है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में पंजीयन अधिकारियों का वेतनमान दूसरे राज्यों की तुलना में बेहद कम है। मध्य प्रदेश में भी उप पंजीयकों की वेतन विसंगति दूर हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में उप पंजीयक का वेतनमान डिप्टी कलेक्टर के समकक्ष है। संघ ने छत्तीसगढ़ में भी इस विसंगति को तत्काल दूर करने की मांग की है।
पंजीयन एवं मुद्रांक अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ की नवीन कार्यकारिणी
अध्यक्ष- वीरेंद्र श्रीवास, उपाध्यक्ष- श्रीमती मंजूषा मिश्रा एवं सुशील देहारी, सचिव- मुकेश अजापाल, संरक्षक- वन्शपति सिंह एवं श्रीमती पावरेज मिंज, सहसचिव -सिद्धार्थ शंकर मिश्रा, कोषाध्यक्ष- दिग्विजय चुरेन्द्र, सह कोषाध्यक्ष- दिलीप कोसरिया, मीडिया सचिव: बृजेश शुक्ला एवं अमित शुक्ला, सलाहकार- श्रीमती लिली पुष्पलता, तकनीकी एवं विधि प्रकोष्ठ- श्रीमती शशि पात्रे खुटियारे, विप्लव श्रीवास्तव, आकाश देवांगन, शशांक गोयल, भुपेंद्र कुर्रे एवं भूपेश मिश्रा, कानूनी सलाहकार- देवराज साव, अमित शुक्ला एवं सिद्धार्थ शंकर मिश्रा, प्रवक्ता- आतिश देवांगन एवं शशिकांत गढ़ेवाल,कार्यकारिणी सदस्य- लक्ष्मी पाण्डेय, प्रतीक खेमुका, अश्विनी गढ़ेवाल, आतिश देवांगन, रणवीर किरार, रविशंकर देवांगन, श्रीमती रश्मि सोनी, श्रीमती सरोज चक्रवती, श्रीमती हर्षा दुबे, श्रीमती पारुल अवस्थी मिश्रा, दानिश खान, हर्ष साहू।







