
दुर्ग, एक्सीडेंट होने पर बेटे को बिना ड्राइविंग लाइसेंस बाइक चलाने देना पिता के लिए भी जेल जाने का कारण बन गया। तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चलाकर सामने से आ रही एक्टिवा को टक्कर मारने के मामले में दुर्ग की सत्र अदालत ने बाइक चालक बेटे की 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं बिना लाइसेंस बेटे को गाड़ी सौंपने के आरोप में पिता को भी 3 महीने के साधारण कारावास से दंडित किया गया है।
मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक द्रोण ताम्रकार ने पैरवी की। घटना पिछले साल 4 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे कोलका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास हुई थी। आरोपी मोहित बघेल अपने दोस्त वासुदेव ठाकुर को पीछे बैठाकर बाइक तेज रफ़्तार से लहराते हुए चला रहा था।
वासुदेव के टोकने और दुर्घटना की आशंका जताने के बावजूद मोहित ने रफ्तार कम नहीं की। इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर विपरीत दिशा में चली गई और सामने से आ रही एक्टिवा से जा टकराई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक्टिवा सवार शादान अली के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई, जबकि उनके साथी उत्तम पांड गंभीर रूप से घायल हो गए। मामले की सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर की कोर्ट ने बेटे और पिता को जेल भेजने का आदेश दिया।
अभिभावकों के लिए बड़ा सबक
मोटरयान अधिनियम के तहत यदि कोई वाहन स्वामी अपने नाबालिग या बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले बच्चे / परिजन को सार्वजनिक स्थान पर गाड़ी चलाने देता है, तो हादसे या चेकिंग की स्थिति में वाहन मालिक पर भी कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और जेल की सजा का सख्त प्रावधान है। दुर्ग कोर्ट का यह फैसला ऐसे सभी अभिभावकों के लिए एक कड़ा संदेश है।
नाबालिग वाहन चालकों पर कार्रवाई
पुलिस ने बीते तीन सालों में 201 प्रकरणों पर कार्रवाई की है. वर्ष 2024 में 13 कार्रवाई की गई, वर्ष 2025 में 78 और 2026 में 110 प्रकरण दर्ज किए गए हैं. आंकड़ों से स्पष्ट हैं कि साल-दर-साल प्रकरणों में बढ़ोतरी हो रही है. पुलिस कार्रवाई के बावजूद लोगों के व्यवहार में बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है।






