CGPSC-2021 भर्ती विवाद: CBI जांच में रहे बेदाग, 60 दिन में मिलेगी नियुक्ति, बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा- चार्जशीट में नाम नहीं तो…..

  • सीजीपीएससी 2021 भर्ती विवाद में हाईकोर्ट का अहम फैसला
  • कोर्ट ने दिया CBI जांच में बेदाग अभ्यर्थियों को नियुक्टि देने का आदेश
  • 2021 को CGPSC ने 171 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था

बिलासपुर. सीजीपीएससी 2021 भर्ती विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने साफ कहा है कि जिन चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ CBI जांच में कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं और जिनका नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं,
उन्हें 10 मई 2024 की वैधता अवधि के भीतर यानी 60 दिन के भीतर नियुक्ति पत्र दिए जाएं. कोर्ट ने ये भी कहा कि सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों पर आरोप हैं, इसलिए पूरी चयन सूची को गलत मानकर सभी की नियुक्ति रोकना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां CBI जांच और भविष्य में सामने आने वाले तथ्यों के अधीन रहेंगी. अगर बाद में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो सरकार सेवा समाप्त कर सकती है.

क्या है पूरा मामला
दरअसल, 26 नवंबर 2021 को सीजी पीएससी ने 171 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था. इनमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक और नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं में भर्ती होनी थी. 11 मई 2023 को परीक्षा परिणाम घोषित हुए, लेकिन तभी सामने आए धांधली के आरोप. आरोप लगे कि पीएससी के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी. CBI जांच शुरू होते ही नियुक्ति आदेश रोक दिए गए. इससे कई ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्ति से वंचित हो गए, जिन पर कोई आरोप नहीं था. इन अभ्यर्थियों ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी.

दलील दी गई कि हम योग्यता से चयनित हुए हैं और हमारे खिलाफ कोई FIR भी नहीं है. राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि बेदाग अभ्यर्थियों के भविष्य से नहीं खेला जा सकता. वहीं PSC ने भी कहा कि हमारा काम सिर्फ चयन सूची जारी करना था, नियुक्ति सरकार की जिम्मेदारी है. PSC भर्ती विवाद पर यह फैसला ना केवल निर्दोष युवाओं के लिए राहत लेकर आया है बल्कि यह भी स्पष्ट कर गया है कि न्याय की बुनियाद पर ही नियुक्तियों का आधार टिका होना चाहिए.

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