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FOREST; तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 50 करोड़ रुपये के जूते खरीदे जाएंगे, चरणपादुका योजना पुनः शुरू

0 तेंदूपत्ता संग्राहकों में खुशियों की लहर

रायपुर, छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह जनहितैषी योजना अब फिर से शुरू की गई है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा छत्तीसगढ़ में 5500 सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत लाभ दिए जा रहे हैं l राज्य शासन ने तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए 30 करोड रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय लिया है।

*12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं को लाभ

छत्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखिया को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं प्रदान की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये व्यय किए। इस कदम से जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं।

वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ

वन मंत्री के विशेष प्रयासों से राज्य सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा चरणपादुकाओं की खरीदी की तैयारी भी शुरु कर दी गई है।

खरीदी जेम पोर्टल से

सरकार ने चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता पूर्ण हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है। चरणपादुका योजना सीधे उन मेहनतकश तेंदूपत्ता संग्राहकों तक राहत पहुँचा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों में कार्य करते हैं और अपनी आजीविका जुटाते हैं।

आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा

छत्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ की कार्यकारी संचालक श्रीमती संगीता गुप्ता ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा परदान की जा रही है, जिसमें तेंदूपत्ता संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर (दुर्घटना मृत्यु या विकलांगता पर), और विभिन्न वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होता है 

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