MINING; बैलाडिला डिपॉजिट 4 और डिपॉजिट 13 से 2026 में शुरू होगा उत्पादन, राज्य सरकार को 7 हजार करोड़ तो सीएमडीसी को मिलेगा 3 हजार करोड़ का राजस्व…

0 सीएमडीसी अध्यक्ष सौरभ सिंह और खनिज सचिव पी दयानंद की संयुक्त प्रेस वार्ता
रायपुर, सीएमडीसी-एनएमडीसी संयुक्त उपक्रम एनसीएल के द्वारा बैलाडिला डिपॉजिट 4 और डिपॉजिट 13 में 2026 में उत्पादन प्रारंभ होगा. दोनों परियोजनाओं से अधिकतम उत्पादन की स्थिति में राज्य शासन को 7 हजार करोड रुपए राजस्व एवं सीएमडीसी को 3 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही क्षेत्र में रोजगार एवं विकास का मार्ग प्रशस्त होगा.

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह निगम की वर्तमान स्थिति के साथ भविष्य की कार्ययोजनाओं को बताने सचिव भौमिकी एवं खनिकर्म पी. दयानंद के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए. उन्होंने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं. इन खनिजों के लिए राज्य सरकार के द्वारा अन्वेषण एवं उत्खनन हेतु खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यम से खनन के लिए उपलब्ध कराया जाता है, जिससे राज्य शासन को राजस्व की प्राप्ति में पिछले 2 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
सीएमडीसी भी इस राज्य में अन्वेषण एवं खनन से संबंधित कार्यों के संपादन का सहभागी है. छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज के आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने तथा खनिज राजस्व में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन (सीएमडीसी) का गठन 07 जून 2001 में किया गया.
सीएमडीसी के कार्य संचालन का स्वरूप माईनिंग एण्ड मार्केटिंग ठेका, उत्खनन ठेका, मार्केटिंग ठेका, एमडीओ, अन्वेषण एवं संयुक्त उपक्रम के माध्यम से अन्वेषण एवं खनन कार्य वर्तमान में कार्यरत् है. वर्तमान में 09 खनिजों के खनन/मार्केटिंग एवं अन्वेषण का कार्य सीएमडीसी के द्वारा किया जा रहा है (टिन, बाक्साईट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैग्नीज, कोरण्डम, डोलोमाईट, कोयला).
(टिन) वर्तमान में सीएमडीसी के द्वारा बस्तर के अनुसूचित जनजातियों के जीविकोपार्जन के लिए विशेष रूप से टिन अयस्क की खरीदी का कार्य किया जा रहा है. संयुक्त उपक्रम के माध्यम से खनन एवं टिन स्मेल्टर का भी संचालन किया जा रहा है. यह खनिज भी क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में आता हैं.
पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को टिन विक्रय करने का सही मूल्य सही वक्त में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया. परिणामस्वरूप यह क्रय मूल्य बढ़कर वर्तमान में 1926.00 रूपये प्रति कि.ग्रा किया गया है. इस प्रकार लगभग 03 गुना अधिक राशि क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को प्राप्त हो रहा है. परिणामस्वरूप टिन ओर की क्रय मात्रा में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है एवं ऑनलाईन क्रय एवं रियल टाईम भुगतान की कार्यवाही प्रचलन में है. इस हेतु TIN-Tribal Incentive for Natural Resources, Portal तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम से ऑनलाईन भुगतान हितग्राहियों को प्राप्त होगा
क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में अन्वेषण कार्य में सीएमडीसी, मॉयल के सहयोग से बलरामपुर जिले में सैग्नीज एवं ग्रेफाईट का अन्वेषण का कार्य कर रही है जिसके उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे है. कोल इंडिया लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन के संबंध में समझौता पत्र हस्ताक्षर किया जा चुका है. इसके क्रियान्वयन के लिए संयुक्त कार्यसमिति का गठन किया गया है. शीघ्र ही इसकी अपेक्षित परिणाम प्राप्त होंगे एवं केन्द्र शासन के निर्देशानुसार क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की ओर सीएमडीसी की सहभागीता बढ़ रही है.
यह समझौता केवल खनन तक सीमित नहीं है अपितु इसमें खनिज संवर्धन, प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और सबसे महत्वपूर्ण हमारे युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसर भी शामिल है. मुझे विश्वास है कि यह पहल रोजगार सृजन करेगी और हमारी युवा पीढ़ी को गरिमा और अवसर प्रदान करेगी. पारदर्शी नीलामी मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने खनिज संसधान प्रबंधन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है. सीएमडीसी ने MSTC के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक सक्षम नीलामी प्रक्रिया द्वारा निविदा और खनिज बिक्री में नये मानक स्थापित किये है.
उक्त पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी से, जहां एक ओर लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड उच्च बिक्री मूल्य प्राप्त हुए है, वही दूसरी ओर लौह अयस्क के उत्खनन में न्यूनतम दर प्राप्त हुआ है, जो प्रतिस्पर्धी पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है. पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से उत्पादित लौह अयस्क के विक्रय से राज्य शासन को लगभग 28.65 करोड़ रूपये का राजस्व साथ ही सीएमडीसी को शुद्ध लाभ लगभग 24 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ. वर्ष 2021 से 2025 तक 1.10 करोड़ रुपए सीएसआर में व्यय हो चुका है एवं 42 लाख रुपए की कार्यों की स्वीकृति प्रचलन में है. माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर एक पेड़ के नाम पर 14700 वृक्षों का रोपड़ किया गया है एवं 29.77 लाख रुपए का व्यय की गई.
चालू वित्तीय वर्ष में 60,000 टन लौह अयस्क की नीलामी की कार्रवाई पारदर्शी तरीके से प्रचलन में है. इस खदान के संचालन से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है. इसी अनुक्रम में आरीडोंगरी में उत्पादन क्षमता 05 लाख टन से 20 लाख टन प्रतिवर्ष किये जाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे है. इस हेतु खनन योजना तैयार किया जा रहा है.




