
नई दिल्ली, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पार्टी पर गांधी परिवार के लगातार नियंत्रण और भाई-भतीजावाद के आरोपों से जुड़े सवालों को टाल दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व से जुड़ा सवाल पार्टी से ही पूछा जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस गांधी परिवार के नेतृत्व से आगे क्यों नहीं बढ़ पाई है, तो उन्होंने कहा कि आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए। सोनिया गांधी ने इस दौरान कई तीखे सवालों का जवाब दिया। बता दें कि सोनिया गांधी की आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ का संपादित अंश अगले हफ्ते की शुरुआत में रिलीज होने वाली है।
द गार्जियन को दिए साक्षात्कार में सोनिया गांधी का मानना था कि कांग्रेस अभी भी भाजपा के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर सकती है। अखबार के लेख में राहुल गांधी की लीडरशिप में कांग्रेस के पतन की ओर इशारा किया। इसमें बताया गया है कि राहुल गांधी ने जब से अपनी मां से कमान ली तो वह नरेंद्र मोदी के खिलाफ पिछले तीन आम चुनाव हार गए।
अखबार में बताया गया है कि गांधी परिवार के लगातार नियंत्रण के कारण, कांग्रेस के लिए भाई-भतीजावाद और राजनीतिक अभिजात वर्ग के नेतृत्व के आरोपों से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया है। जब सोनिया से कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार जो 2014 तक एक दशक तक सत्ता में रही और उसके कार्यकाल से जुड़े विवादों के बारे में पूछा गया, तो वह सवालों का जवाब टालते दिखीं।
आपातकाल पर भी दिया जवाब
बातचीत 1975 में उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) की ओर भी मुड़ी। उन्होंने इस फैसले को एक “गलती” बताया और कहा कि उन्हें लगता है कि बाद में खुद इंदिरा गांधी को भी ऐसा ही महसूस होने लगा था। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि आपातकाल के दौरान वह कभी सहज नहीं थीं। मुझे लगता है कि यह उन पर एक भारी बोझ की तरह था।
सोनिया गांधी ने बताया कि आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर गांधी परिवार में मतभेद थे। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, उनके पति राजीव गांधी ने इस कदम का विरोध किया था और अपनी मां को अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी। बताया जाता है कि उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने विपक्ष के खिलाफ और भी सख्त रुख अपनाने पर जोर दिया था।
अखबार के अनुसार, जब उनसे यह आरोप पूछा गया कि पार्टी एक ही परिवार के नियंत्रण में है, तो सोनिया गांधी ने भाई-भतीजावाद के सवाल को टाल दिया। भाई-भतीजावाद के आरोप पर गोलमोल जवाब देते हुए सोनिया गांधी ने कहा, “हम सभी चुनाव लड़ते हैं: हम जीतते भी हैं और हारते भी हैं। हम सभी ने ऐसा किया है।
सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की हत्या पर भी बात की
साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने अपने पति राजीव गांधी को खोने के निजी सदमे के बारे में भी बात की, जिनकी 1991 में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने बताया कि उनके निधन के बाद उन्होंने कैसे खुद को संभाला। उनके आवास पर हो रही इस बातचीत में उनकी बेटी प्रियंका भी शामिल थीं। उन्होंने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या को याद करते हुए बताया कि उन्हें आतिशबाजी जैसी आवाज सुनाई दी, और फिर उन्होंने अपनी सास को खून से लथपथ और गोलियों के ज़ख्मों के साथ देखा।
सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी को होश में लाने की कोशिश की थी
इंदिरा गांधी को उनके दो अंगरक्षकों ने गोली मार दी थी। सोनिया गांधी ने बताया कि अस्पताल ले जाते समय उन्होंने इंदिरा गांधी को होश में लाने की कोशिश की थी। उन्होंने याद करते हुए कहा कि हर तरफ खून ही खून था, और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं दे रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने अस्पताल तक के सफर को बेहद कष्टदायक बताया। सड़क पर ट्रैफिक कम होने के बावजूद, यह सफर बहुत ही धीमा और तकलीफदेह लग रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें तभी समझ आ गया था कि इंदिरा गांधी शायद अब नहीं रहीं, क्योंकि वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं।







